सिर्फ सूर्य को प्रसन्न कीजिए, मिलेगी तरक्की ही तरक्की

सूर्य से सरकारी नौकरी, प्रमोशन आदि के बारे में भी विचार किया जाता है, लेकिन बारह राशियों में सूर्य अलग-अलग फल देता है।

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में प्रत्येक ग्रह के अपने-अपने गुणधर्म, विशेषताएं और उनके अंतर्गत आने वाले कार्य हैं जिनसे किसी व्यक्ति की कुंडली में संबंधित ग्रहों का विचार किया जाता है। सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु इन नौ ग्रहों की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं। कुंडली का फलादेश इन ग्रहों की स्थिति, ग्रहों के साथ युति, उच्च, निम्न आदि पर निर्भर करता है।

ज्योतिष में नौ ग्रहों में सूर्य को ग्रहों के राजा की संज्ञा दी गई है। इसलिए सूर्य को सर्वाधिक महत्व दिया गया है। मान-सम्मान, यश-अपयश, कीर्ति, प्रसिद्धि, ज्ञान, आयु, आरोग्य, नेत्र रोग, पिता, आत्मा, शारीरिक बनावट और लक्ष्मी का विचार सूर्य से किया जाता है।

कुंडली में सूर्य अच्छा होता है तो...

जिस व्यक्ति की कुंडली में सूर्य अच्छा होता है वे व्यक्ति पूर्ण सम्मानित जीवन व्यतीत करते हैं। सूर्य से सरकारी नौकरी, प्रमोशन आदि के बारे में भी विचार किया जाता है, लेकिन बारह राशियों में सूर्य अलग-अलग फल देता है। सूर्य ग्रहों का राजा अवश्य है लेकिन जब कुंडली का अध्ययन किया जाता है तो सूर्य को प्रमुख ग्रह मानते हुए अन्य ग्रहों की स्थिति का आंकलन भी आवश्यक होता है।

आइये हम जानते हैं सूर्य किस राशि में होने पर क्या प्रभाव देता है। साथ ही यह भी जानते हैं कि सूर्य की श्रेष्ठता का लाभ उठाने के लिए क्या-क्या उपाय किए जा सकते हैं:

विचार, शील, मस्तिष्क, स्वभाव...

विचार, शील, मस्तिष्क, स्वभाव...

कुंडली के द्वादश भावों में सूर्य को लग्न भाव का कारक ग्रह माना जाता है। लग्न भाव से व्यक्ति रंग-रूप, शारीरिक बनावट, आयु, सुख-दुख, विचार, शील, मस्तिष्क, स्वभाव आदि का विचार किया जाता है। अलग-अलग राशियों में स्थित सूर्य अलग-अलग प्रभाव दिखाता है। आप भी किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य की विभिन्न राशियों में उपस्थिति देखकर उस व्यक्ति के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं।

आत्मबली, स्वाभिमानी, प्रतापी

आत्मबली, स्वाभिमानी, प्रतापी

  • मेष: जन्म कुंडली में सूर्य यदि मेष राशि में विराजमान हो तो व्यक्ति आत्मबली, स्वाभिमानी, प्रतापी, चतुर्थ, पित्त विकारी, लड़ाकू, साहसी, महत्वाकांक्षी, शूरवीर, गंभीर, उदार होता है।
  • वृषभ: कुंडली में सूर्य वृषभ राशि में हो तो जातक स्वाभिमानी, व्यवहारकुशल, शांत, पापकर्मों से डरने वाला, मुखरोगी होता है।
  • मिथुन: मिथुन राशि में सूर्य होने पर जातक विवेकी, विद्वान, बुद्धिमान, मधुरभाषी, प्रेमी, धनवान, ज्योतिषी, इतिहासप्रेमी, उदार होता है।
  • कर्क: चंद्र की राशि में होने पर कीर्तिमान, लब्ध प्रतिष्ठित, कर्त्तव्यपरायण, चंचल, साम्यवादी, परोपकारी, इतिहास का जानकार होता है। ऐसा व्यक्ति हमेशा कफ से परेशान रहता है।
  • यह शुक्र की राशि है

    यह शुक्र की राशि है

    • सिंह: यह सूर्य की अपनी राशि है। यदि जातक की कुंडली में सूर्य स्वराशि यानी सिंह में विराजमान हो तो वह योगाभ्यासी, सत्संगी, पुरुषार्थी, धैर्यशाली, तेजस्वी, उत्साही, गंभीर, क्रोधी होता है। ऐसा व्यक्ति वनों में रहना या वहां घूमना-फिरना पसंद करता है।
    • कन्या: कन्या राशि का सूर्य जातक को शक्तिहीन बनाता है, लेकिन वह लेखन के क्षेत्र में उच्च कीर्तिमान स्थापित करता है। यह व्यक्ति मंदाग्निरोगी, दुर्बल और व्यर्थ की बातें करने वाला भी देखा गया है।
    • तुला: यह शुक्र की राशि है और शुक्र प्रेम, भोग विलास, यौनाचार आदि का प्रतिनिधि ग्रह है। जब सूर्य शुक्र की राशि तुला में हो तो व्यक्ति व्यभिचारी होता है। वह परस्त्री या परपुरुषगामी होता है। विदेशी आचार-विचार ऐसे व्यक्ति को लुभाते हैं और वह मंदाग्निरोगों से पीड़ित रहता है।
    • गुप्त रूप से कार्य करने वाला

      गुप्त रूप से कार्य करने वाला

      • वृश्चिक: इस राशि का सूर्य जातक का गुप्त विद्याओं का जानकार, गुप्त रूप से कार्य करने वाला, उदररोगी, क्रोधी, साहसी, लोभी, चिकित्सक बनाता है।
      • धनु: सूर्य धनु राशि में हो तो व्यक्ति बुद्धिमान, योगमार्ग पर चलने वाला, विवेकी, धनी, आस्तिक, व्यवहारकुशल, दयालु और शांत होता है।
      • मकर: शनि की राशि मकर में सूर्य की उपस्थिति जातक को चंचल, झगड़ालू, अनेक भाषाओं का जानकार, दुराचारी, लोभी बनाता है।
      • कुंभ: कुंभ में सूर्य हो तो व्यक्ति स्थिरचित्त, कार्यों को पूर्ण दक्षता से संपन्न करने वाला, क्रोधी, स्वार्थी बनाता है।
      • मीन: मीन राशि का सूर्य ज्ञानी, विवेकी, योगी, प्रेमी, यशस्वी, व्यापारी बनाता है।
      • कैसे करें सूर्य को प्रसन्न?

        कैसे करें सूर्य को प्रसन्न?

        • ज्योतिष में कहा जाता है सूर्य को साध लेने से सभी ग्रह सध जाते हैं। सूर्य को प्रसन्न करने के लिए कुछ विशेष साधनाएं और उपाय बताए गए हैं। उन्हें अपनाकर आप भी अपना जीवन सुखी कर सकते हैं।
        • सूर्य को प्रतिदिन सूर्योदय के समय जल चढ़ाना सर्वाधिक चर्चित उपाय है। इस बात का ध्यान रखना है कि जल केवल उगते सूर्य को ही चढ़ाया जाना चाहिए। तभी लाभ मिलता है।
        • आदित्यहृदय स्तोत्र का नियमित पाठ करने से साहस, शौर्य, बल में वृद्धि होती है। शत्रु परास्त होते हैं। कार्यों की बाधाएं समाप्त होती हैं।
        • सूर्य के मंत्र ओम घृणिः सूर्याय नमः की एक माला रूद्राक्ष या लाल चंदन से प्रतिदिन जाप करने से धनागम अच्छा होता है। कर्ज मुक्ति मिलती है।
        • सूर्य यंत्र की स्थापना घर में करने से बुरी नजर से बचाव होता है। घर से रोगों का नाश होता है।

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