Full Moon : अक्टूबर की इस तारीख को चांद होगा लाल? क्यों कह रहे हैं इसे 'हंटर मून'?
Full Moon : अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को 'रास पूर्णिमा' या 'शरद पूर्णिमा' कहा जाता है, कहते हैं इस दिन आसमान से अमृत बरसता है और इसी दिन को सर्दी का आगाज माना जाता है, इस बार ये पावन दिन 9 अक्टूबर को है वैसे तो हर पूर्णिमा अपने आप में काफी खास होती है लेकिन इस बार की पूर्णिमा काफी स्पेशल है क्योंकि इस दिन चांद पूरा तो होगा ही और साथ ही इसका रंग थोड़ा गुलाबी सा होगा, जिसे कि Hunter Moon भी कहा जा रहा है । नासा अपनी वेबसाइट पर इसका लाइव प्रसारण भी कर सकता है।

'हंटर मून'
जिस तरह से हमारे यहां धर्म-ग्रंथों में पूर्णिमा का वर्णन किया गया है ठीक उसी तरह से अमेरिका में पूर्णिमा यानी की कंपलीट चांद को सीजन के हिसाब से अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। दरअसल ऐसा कहा जाता है कि अमेरिका के किसानों के पास जब जूलियन या ग्रेगोरियन कैलेंडर नहीं था, तब वो लोग मौसम के हिसाब से पूर्णिमा को व्याखित करते थे। इसलिए अक्टूबर की पूर्णिमा को वो 'हंटर मून' कहते हैं।

शिकारियों को शिकार करने में काफी आसानी
इसके पीछे कारण ये है कि अक्टूबर में कंपलीट चांद का प्रकाश काफी सुनहरा होता है और ऐसा माना जाता है कि इस लाइट में शिकारियों यानी कि हंटर्स को शिकार करने में काफी आसानी होती होगी इसलिए इसे किसानों ने 'हंटरमून' कह डाला। इसके अलावा कुछ जगहों पर इसे 'ग्रास मून' और 'ट्रैवल मून' भी कहा जाता है। हालांकि कहीं-कहीं पर लोग चांद के कलर बदलने को अच्छा नहीं मानते हैं।

चांद का रंग परिवर्तन मतलब संकट?
उनका कहना है कि चांद का रंग परिवर्तन आने वाले संकट की आहट होता है, ये बाढ़, भूकंप और प्रलय जैसी चीजों की ओर इशारा करता है, हालांकि वैज्ञानिक इसे सिरे से नकारते हैं। उनका कहना है कि चंद्रमा जब पृथ्वी के काफी क्लोज होता है तो बहुत चमकीला नजर आता है, जिससे इसके रंग में परिवर्तन होता है। ये एक भौगोलिक प्रक्रिया है, जिसका किसी प्रलय से कोई लेना-देना नहीं है।

कुछ खास बातें
आपको बता दें कि चांद के पूर्ण होने को 'पूर्णिमा' कहा जाता है, मूल रूप से ये संस्कृत का शब्द है। मालूम हो कि पृथ्वी, सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है और चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर लगाता है। उपग्रह चंद्रमा को पृथ्वी का पूरा चक्कर लगाने में करीब 27 दिन का वक्त लगता है।

पृथ्वी की पोजिशन थोड़ी सी तिरछी
इस चक्कर के दौरान जब सूर्य और चंद्रमा के बीच में पृथ्वी आ जाती है लेकिन तीनों एक रेखा पर नहीं होते हैं बल्कि पृथ्वी की पोजिशन थोड़ी सी तिरछी होती है, उस वक्त सूर्य का प्रकाश सीधे चंद्रमा पर पड़ता है जिससे कि वो गोल और चमकीला दिखता है और पृथ्वी सीध में होती नहीं है इसलिए हम उसे पूर्ण रूप से देख पाते है, यही स्थिति पूर्णिमा कहलाती है।

धार्मिक महत्व
वैसे पूर्णिमा का धार्मिक भी काफी महत्व है. इस दिन विशेष पूजा होती है। कहते है इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से इंसान को सुख और वैभव प्राप्त होता है।












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