Diamonds : चार वर्ण के होते हैं हीरे, घर में रखने से आती है अटूट संपदा
नई दिल्ली, 11 अगस्त। नौ ग्रहों के रत्नों में हीरा सबसे महंगा रत्न होता है। यह काफी आकर्षक होता है इसीलिए प्राचीनकाल से राजा-महाराजाओं की पसंद रहा है। हीरे जड़ित मुकुट आदि आभूषण राजा-रानियां धारण करते आए हैं और आज भी आमजन में भी हीरे के प्रति आकर्षण छुपा नहीं है। ज्योतिष की दृष्टि से देखा जाए तो हीरा शुक्र का रत्न होता है। यह तुरंत प्रभाव दिखाता है इसलिए ज्योतिषीय कारणों से हीरा धारण कर रहे हैं तो पहले किसी योग्य और ज्ञानी ज्योतिषी से अपनी कुंडली का परीक्षण करवा लेना चाहिए, यदि आपके लिए उपयुक्त हो तो ही हीरा धारण करना चाहिए।

मूल रूप से हीरे को चार वर्णो में विभाजित किया गया है। यह चार वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र होते हैं। श्वेत रंग का हीरा ब्राह्मण वर्ण, अरुण रंग का हीरा क्षत्रिय वर्ण, पीत रंग का हीरा वैश्य वर्ण और कृष्णाभ हीरा शूद्र वर्ण का कहा गया है। जो हीरा जिस वर्ण का हो उसे उसी वर्ण के व्यक्ति द्वारा धारण करने पर शुभ फल प्राप्त होते हैं। वराहमिहिर कहते हैं ब्राह्मणों को शुक्ल वर्ण का, क्षत्रियों को लाल रंग का, वैश्यों को शिरीष पुष्प के समान वर्ण वाला और शूद्रों को नीले रंग का हीरा धारण करना चाहिए। शास्त्रीय मान्यता है किजो मनुष्य अपने घर में चारों वर्णो के हीरे रखता है, उसे अटूट संपदा प्राप्त होती है।
वर्णो का क्या लाभ
- ब्राह्मण वर्ण का हीरा धारण करने वाला व्यक्ति अगले सातवें जन्म में ब्राह्मण के घर में जन्म लेता है।
- क्षत्रिय वर्ण का हीरा पहनने से मनुष्य पराक्रमी होता है। उसके बल की कीर्ति चारों दिशाओं में फैलती है।
- वैश्य वर्ण का हीरा धारण करने से व्यापार-व्यवसाय में उन्नति होती है।
- शूद्र वर्ण का हीरा धारण करने से व्यक्ति अपने शारीरिक श्रम द्वारा धनवान बनता है।
- जो मनुष्य चारों वर्णो का हीरा अपने घर में रखता है, उसके पास धन की कमी नहीं होती। वह साक्षात कुबेर के समान बन जाता है। उस व्यक्ति के घर में विघ्न, बाधा, अकालमृत्यु तथा शत्रुभय भी नहीं होता है।












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