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मंगल रत्न मूंगा से मंगलमय हो जाता है जीवन

मूंगा समुद्र में पाया जाता है। अच्छे किस्म के मूंगें भूमध्य सागर के तटवर्ती क्षेत्र अल्जीरिया, ईरान की खाड़ी व स्पेन के समुद्री तट पर पाये जाते है।

लखनऊ। मूंगा रत्न मंगल ग्रह से सम्बन्धित होता है। इसके विभिन्न नाम है, ये कहॉ पाया जाता है ? इसका रासयानिक नाम क्या है ? इसकी असली पहचान कैसी की जाये ? मूंगा किसे पहनना चाहिए आदि इन बातों के बारें में आप सभी को अपने इस लेख से जानकारी देने का प्रयास कर रहा हूं।

  • विविध नाम-प्रवाल, विद्रूम, लतामणि, मिस्जान,मूंगा और कोरल आदि नाम मूंगा के होते है।
  • मूंगा के उद्गम स्थान-मूंगा समुद्र में पाया जाता है। अच्छे किस्म के मूंगें भूमध्य सागर के तटवर्ती क्षेत्र अल्जीरिया, ईरान की खाड़ी व स्पेन के समुद्री तट पर पाये जाते है।
  • समुद्र में एक समुद्री जन्तु होता है, जो लसीला चिपचिपा पदार्थ छोड़ता है। उचित वातावरण पाकर यह जन्तु जल से कैल्श्यिम कार्बोनेट के कठोर एंव सख्त ढेर को निक्षिप्त कर देता है। यही कैल्श्यिम कार्बोनेट कुछ वर्षो में परिपक्व होकर मूूंगा बन जाता है।
  • समुद्र से निकालने के बाद मॅूगें को काटा जाता है और विभिन्न साईजों के दाने बनाये जाते है। इटली का नेपल्स नाम का स्थान इस उद्योग का एक मात्र स्थान है। मूंगा से सभी प्रकार आभूषण बनाये जाते है, विशेषकर मालायें, हार व हाथ की अॅगूठी आदि।

मूंगा का भौतिक गुण

मूंगा का भौतिक गुण

यह एक अपारदर्शक पत्थर होता है। मूंगा विभिन्न रंगो में पाया जाता है, जैसे-लाल, गुलाबी, नारंगी सफेद व काले रंग में होता है। इसका आपेक्षिक घनत्व लगभग 2.65 होता है और इसकी कठोरता 3.5 से लेकर 4 तक उच्चकोटि की होती है। इसका वर्तनांक 1.5486 तथा 1.658 होती है। इस तरह मॅूगे का दुहरावर्तन बहुत अधिक होता है।

क्वालिटी

क्वालिटी

आयुर्वेद ग्रन्थों में श्रेष्ठ मूंगा की सात विशेषतायें बताई गई है। जैसे-गोलाकार, लम्बा, चिकना, गाढ़ा, वर्ण रहित, मोटा एंव पके हुये बिम्बफल के समान आदि। जिस मूंगा का रंग हिंगुल, सिन्दूर से मिलता-जुलता है, वह मूंगा श्रेष्ठ गुण वाला माना जाता है।

असली मूंगा

असली मूंगा

मूंगा पहनने से पहले यह जानना बेहद जरूरी है कि वह असली है या नकली।

  • यदि मूंगे को रक्त में रख दिया जाये तो आसपास का रक्त शीघ्र ही जमने लगता है।
  • यदि मूंगे को कच्चे दूध में डाला जाये तो लाल रंग की झाग दिखलाई पड़ती है।
  • मूंगे को ररू में रखकर धूप में रख दिया जाये तो कुछ समय पश्चात रूई जलने लगती है।
  • नुकसान

    नुकसान

    • यदि उत्तम क्वालिटी का मूंगा धारण किया जाये तो लाभ मिलता है औ अगर दोष युक्त मूंगा पहना जाये तो नुकसान भी उठाना पड़ता है।
    • जिस मूंगे में दो रंग हो उसे दोरंगा मूंगा कहते है। ऐसा मॅूगा धारण करने से धन सम्पत्ति की हानि होती है एवं लड़ाई-झगड़े बढ़ते है।
    • कटा-फटा मूंगा पहनने से सन्तान को कष्ट या हानि पहुंचती है।
    • जिस मूंगे में गढढे हो, उसे पहनने से जीवन साथी में तनाव बढ़ता है और जीवन साथी को रोग भी हो सकता है।
    • जिस मूंगे में काला धब्बा हो, उसे धारण करने से जातक की दुर्घटना आदि हो सकती है। सफेद धब्बे होने पर धन सम्मपत्ति आदि की हानि होती है।
    • मूंगा किसे धारण करना चाहिए?

      मूंगा किसे धारण करना चाहिए?

      ज्योतिष शास्त्र में मंगल को युद्ध का कारक कहा गया है, इसलिए इसे सेनापति की पदवी दी गई है। जो लोग कमजोर हो, सुस्त हो, डरपोक हो, आलसी हो, उन्हें मूंगा धारण करने से अद्भुत शक्ति प्रदान होती है। जिन बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता या बहुत आलसी है, उन्हें मूंगा अवश्य धारण करना चाहिए। सेना, फोर्स, आर्मी आदि में सेवारत कर्मियों को मूंगा पहनने से पदोन्नति मिलती है। शत्रुओं पर विजय पाना हो, मुकद्में में सफलता लेना हो तो मूंगा धारण करें। भूमि व प्रापर्टी का काम करने वाले लोगों को मूंगा पहनने से अत्यन्त लाभ मिलता है। सर्जन डाक्टरों को मूंगा धारण करने से उनके आपरेशन सफल होते है। जन्मकुण्डली में अगर नीच का मंगल हो या अशुभ भावों में पड़ा हो तो मूंगा कदापि न धारण करने अन्यथा विवाद में फॅस सकते है।

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