आज रात में गुरु होंगे उदय, 15 जनवरी को समाप्त होगा धनु मलमास, शुरू होंगे शुभ काम
नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में वैसे तो प्रत्येक ग्रह को महत्वपूर्ण और विशेष माना गया है, लेकिन सूर्य और बृहस्पति ऐसे ग्रह हैं जिन्हें ज्योतिष और धार्मिक दृष्टि से बड़ा महत्व दिया गया है। सूर्य को प्रकृति का पोषणकर्ता कहा गया है, वहीं बृहस्पति को समस्त शुभ कार्यों का कारक ग्रह माना जाता है। इसलिए किसी भी शुभ कार्य को संपन्न करने के लिए बृहस्पति की शुभ स्थिति जरूर देखी जाती है। मलमास ऐसा समय होता है जिसमें बृहस्पति सबसे दूषित अवस्था में होते हैं, इसलिए मलमास के दौरान कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है। 16 दिसंबर 2019 से चल रहा धनु मलमास 15 जनवरी 2020 को समाप्त हो रहा है। इसलिए विवाह, सगाई, मुंडन आदि समस्त शुभ कार्य 15 जनवरी से प्रारंभ हो जाएंगे।

क्या होता है मलमास?
सूर्य प्रत्येक राशि में एक-एक माह तक गोचर करता है। सूर्य जब-जब बृहस्पति की राशि धनु और मीन में आता है, तब-तब बृहस्पति मलीन हो जाते हैं। मलीन होने का अर्थ यह है कि बृहस्पति सूर्य के तेज में निस्तेज हो जाते हैं। इस समयावधि को मलमास कहा जाता है।
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चूंकि शुभ कार्यों में बृहस्पति का साक्षी होना आवश्यक है इसलिए सूर्य के धनु और मीन राशि में गोचर के दौरान शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। सूर्य जब इन राशियों को छोड़कर अगली राशियों में बढ़ जाता है तब मलमास समाप्त हो जाता है।

गुरु हो रहे हैं उदय
गुरु 17 दिसंबर 2019 से अस्त भी चल रहे हैं। गुरु का उदय 10 जनवरी की रात्रि में 8.12 बजे हो रहा है। इसके शुभ प्रभाव भी समस्त राशि के जातकों को मिलने वाले हैं। जिन जातकों की कुंडली में बृहस्पति वक्री थे या शत्रु ग्रहों के साथ बैठे हों, या शत्रु के घर में बैठे हों या जिन पर शत्रु ग्रहों की दृष्टि हो उन जातकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। गुरु के उदय होने से इससे जनित बुरे प्रभाव समाप्त होंगे।

क्या करें मलमास समाप्ति पर
- मलमास समाप्त होने पर समस्त शुभ कार्यों पर लगे प्रतिबंध हट जाएंगे। विवाह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे कार्य फिर से प्रारंभ हो जाएंगे।
- मलमास की समाप्ति वाले दिन यानी 15 जनवरी को उगते सूर्य को अर्घ्य अवश्य देना चाहिए। इससे शारीरिक रोग दूर होते हैं। नेत्र पीड़ा में आराम मिलता है।
- सूर्य और बृहस्पति के शुभ प्रभाव व्यक्ति और पर्यावरण को मिलने लगते हैं।
- मलमास समाप्ति पर पवित्र नदियों में स्नान करके दान-पुण्य करना चाहिए।
- इस दिन सात गोमती चक्र पर केसर की बिंदी लगाकर पूजा स्थान में रखने से धन-समृद्धि में वृद्धि होने लगती है।
- विवाह की कामना से इस दिन भगवान शिव-पार्वती की पूजा करें।












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