Shani Mantra: शनिदेव के यह 5 मंत्र, करेंगे हर कष्टों का अंत
नई दिल्ली। शनि को सूर्य पुत्र माना जाता है, कहते हैं अगर शनि देव गुस्सा हो जाएं तो इंसान कभी भी अपने कष्टों से मुक्त नहीं हो पाता है और इसलिए उनका प्रसन्न होना बेहद जरूरी है। इसलिए आज हम आपको बताते हैं शनिदेव को प्रसन्न करने के कुछ खास मंत्र, जिनका जाप रोज करने आप अपनी परेशानियों से मुक्ति पा सकते हैं।

ये हैं वो 5 मंत्र, जिनसे खुश होते हैं शनिदेव
- ऊं शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये शन्योरभिस्त्रवन्तु न:।
- ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:
- मंत्र- ऊं ऐं ह्लीं श्रीशनैश्चराय नम:।
- कोणस्थ पिंगलो बभ्रु: कृष्णो रौद्रोन्तको यम:।
- सौरि: शनैश्चरो मंद: पिप्पलादेन संस्तुत:।।

शनि प्रकृति में संतुलन पैदा करता है
ऐसा माना जाता है कि शनि प्रकृति में संतुलन पैदा करता है, और हर प्राणी के साथ न्याय करता है। जो लोग अनुचित विषमता और अस्वाभाविक समता को आश्रय देते हैं, शनि केवल उन्हें ही दुख पहुंचाता है, इन्हें न्याय का देवता भी कहते हैं।

पिता विरोधी शनिदेव
धर्मग्रंथो के अनुसार सूर्य की द्वितीय पत्नी छाया के गर्भ से शनि देव का जन्म हुआ, जब शनि देव छाया के गर्भ में थे तब छाया, भगवान शंकर की भक्ति में इस कदर लीन थीं कि उन्हें अपने खाने-पीने का भी होश नही था, जिसका असर उनके गर्भ में पड़ने वाले बच्चे पर भी पड़ा और बच्चे का वर्ण श्याम हो गया, जिसकी वजह से सूर्य का पूरा लाड़ बेटे शनि को नहीं मिला और इसी कारण शनिदेव को पितृ विरोधी कहा जाता है।

शनिदेव को मिला वरदान
पुराणों में उल्लेख है कि शनिदेव ने जब अपने पिता सूर्य का यह बर्ताव देखा तो उन्होंने भगवान शिव की उपासना की जिस पर भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्होंने वरदान मांगने को कहा तब शनिदेव वे कहा कि युगों-युगों से जबरदस्ती मेरी मां छाया को गलत ठहराया गया है इस कारण मुझे मेरे पिता से ज्यादा शक्तिशाली बनाओ ताकि मैं अपनी मां का बदला अपने पिता से ले सकूं तब शिवजी ने शनि को वरदान देते हुए कहा कि नवग्रहों में तुम्हारा सर्वश्रेष्ठ स्थान होगा! मानव तो क्या देवता भी तुम्हरे नाम से भयभीत रहेंगे।












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