बगुलामुखी जयंती आज, हर कष्ट को दूर करती हैं 'पीताम्बरा देवी'

लखनऊ। शास्त्रों के मुताबिक वैशाख मास शुक्ल पक्ष अष्टमी को मां बगुलामुखी का जन्मदिवस माना जाता है। इसलिए इस तिथि को 'बगुलामुखी जयन्ती' मानने की परम्परा चली आ रही है। इस बार 23 अप्रैल दिन बुधवार को मां बगुलामुखी की जयन्ती पड़ रही है।

आइए इस खास अवसर पर मां बगुलामुखी के बारे में जानते है कुछ रोचक बातें और पूजन विधि....

मां बगलामुखी को पीताम्बर या ब्रह्मास्त्र रुपणी भी कहा जाता है

मां बगलामुखी को पीताम्बर या ब्रह्मास्त्र रुपणी भी कहा जाता है

मां बगलामुखी को पीताम्बर या ब्रह्मास्त्र रुपणी भी कहा जाता है। शत्रुओ को नष्ट करने की इच्छा रखने वाली तथा समिष्टि रूप में परमात्मा की संहार शक्ति ही बगला है। पीताम्बरा विद्या के नाम से विख्यात बगलामुखी की साधना प्रायः शत्रुभय से मुक्ति और वाक्सिद्धि, वाद-विवाद में विजय के लिये माॅ बगुलामुखी की उपासाना की जाती है। इनकी उपासना में हल्दी की माला पीले फूल और पीले वस्त्रो का विधान है। दश माहविद्याओ में इनका आठवां स्थान है।

बगुलामुखी कथा

बगुलामुखी कथा

एक बार की बात है कि सतयुग में सम्पूर्ण जगत को नष्ट करने वाला एक भयंकर तूफान आया। सभी प्राणियो के जीवन पर संकट को देख कर भगवन विष्णु व्यथित होकर भगवान शंकर के पास समस्या के समाधान हेतु गये । भोले बाबा ने विष्णु जी से कहा कि आप सौराष्ट्र देश में हरिद्रा सरोवर के समीप जाकर भगवती को प्रसन्न करने के लिये तप करो वही इस तूफान से समस्त जगत के प्राणियों की रक्षा कर पायेगी।

विष्णु जी के तपस्या

विष्णु जी के तपस्या

विष्णु जी के तपस्या से प्रसन्न होकर श्रीविद्या ने उस सरोवर से बगलामुखी रूप में प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिया तथा विध्वंसकारी तूफान का तुरंत स्तम्भन कर दिया। बगलामुखी महाविद्या भगवन विष्णु के तेज से युक्त होने के कारण वैष्णवी है। मंगलयुक्त चतुर्दशी की अर्धरात्रि में इसका प्रादुर्भाव हुआ था। श्री बगलामुखी को ब्रह्मास्त्र के नाम से भी जाना जाता है

 बगलामुखी व्रत पूजन विधि

बगलामुखी व्रत पूजन विधि

आज के दिन प्रातःकाल नियत कर्मो से निवृत होकर पीले रंग का वस्त्र धारण करें। शास्त्रों के अनुसार साधना करने वाले व्यक्ति को अकेले मन्दिर में अथवा किसी सिद्ध पुरूष के साथ बैठकर माता बगलामुखी पूजन व जप करना चाहिए। पूजन वाले स्थान को गंगाजल से पहले पवित्र कर लें उसके बाद उस स्थान पर पूजन प्रारम्भ करें। तत्पश्चात उस स्थान पर एक चैकी रख उस पर माता बगलामुखी की प्रतिमूर्ति को स्थापित करें। तत्पश्चात माॅ बगलामुखी व्रत का संकल्प हाथ में पीले चावल, हरिद्रा, एवं पीले फूल, दक्षिणा लेकर लेकर करें। माता के पूजन में धूप, दीप एवं पीले फल, पीले फूल व पीले मीठे का भोग लगायें। व्रत के दिन व्रती को निराहार रहना चाहिए। पूजन के बाद रात्रि को एक समय फलाहार किया जा सकता है।

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