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Astro Tips: जानिए इन योगों के बारे में क्योंकि ये बिगाड़ देते हैं बना-बनाया काम

By पं. अनुज के शु्क्ल
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    लखनऊ। भविष्य को जान लेने वाला विज्ञान ज्योतिष विज्ञान एक सम्पूर्ण विज्ञान है। इस व्यापक विषय का जितना अध्ययन किया जाये उतना ही कम लगता है। फलित ज्योतिष में कुण्डली के द्वारा व्यक्ति के जीवन में होने वाली शुभ व अशुभ घटनाओं के बारें में जाना जा सकता है। ज्योतिष में हजारों योगों के बारें में बताया गया है।

    Astro Tips: जानिए इन योगों के बारे में जिससे रहें सतर्क

    चलिए आज हम आपको ज्योतिष के कुछ महत्पूर्ण योगों के बारें में बताते हैं...

    • रज्जु योगःकुण्डली में जब सभी ग्रह चर राशियों में स्थित हो तो रज्जु योग बनता है। इस योग में उत्पन्न जातक भ्रमणशील, सुन्दर, परदेश में रहने पर सुखी, क्रूर, दुष्ट स्वभाव एवं स्थानान्तर में उन्नति करने वाला होता है।
    • मुसल योगःसमस्त ग्रह स्थिर राशियों में हो तो मुसल योग होता है। इस योग में जन्म लेने वाला मनुष्य मानी, ज्ञानी, धनी, राजमान्य, प्रसिद्ध, अधिक पुत्रवाला, राजनेता एवं शासनाधिकारी होता है।
    • नल योगःजब समस्त ग्रह द्विस्वभाव राशियों में स्थित हो तो नल योग बनता है। इस योग में जन्म लेने वाला जातक हीन या अधिक अंग वाला, धन संग्रहकारी, अति चतुर, राजनैतिक दाॅव-पेंचों में प्रवीण तथा चुनाव में सफलता प्राप्त करता है।
    • माला योगःबुध, गुरू, शुक्र चैथे, सप्तम व दशम स्थान में हों और शेष ग्रह इन स्थानों से भिन्न स्थानों में हो तो माला योग बनता है। इस योग में जन्म लेने वाला मनुष्य धनी, वस्त्राभूषण-युक्त, भोजनादि से सुखी, अधिक स्त्रियों से प्रेम करने वाला एवं राजनीति के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है।
    • सर्प योगःसूर्य, शनि, मंगल चैथे, सप्तम व दशम सथान में हों और चन्द्र, गुरू, शुक्र और बुध इन स्थानों से भिन्न स्थानों में स्थित हों तो सर्प योग बनता है। इस योग के होने से जातक कुटिल, निर्धन, दुःखी, दीन, भिक्षाटन करने वाला, चॅदा माॅगकर खा जाने वाला एवं सर्वत्र निन्दा प्राप्त करने वाला होता है।
    • गदा योगःसमीपस्थ दो केन्द्र प्रथम व चतुर्थ या सप्तम, दशम में समस्त ग्रह हों तो गदा नामक योग बनता है। इस योग वाला जातक धनी, धर्मात्मा, शास्त्रज्ञ, संगीतप्रिय और पुलिस विभाग में नौकरी करने वाला होता है। इस योग वाले जातक का भाग्य 28 वर्ष की अवस्था में चमकता है।
    • शकट योगःलग्न और सप्तम में समस्त ग्रह हों तो शकट योग का निर्माण होता है। इस योग वाला जातक रोगी, मूर्ख, ड्राइवर, स्वार्थी एवं अपना काम निकालने में बहुत प्रवीण होता है।
    • पक्षी योगःचुतर्थ और दशम भाव में समस्त ग्रह हों तो पक्षी योग होता है। इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति राजदूत, गुप्तचर, भ्रमणशील, कलहप्रिय एवं सामान्यतः धनी होता है। शुभ ग्रह उक्त स्थानों में हों और पापग्रह 3, 6, 11 भावों में हों तो जातक न्यायधीश और मण्डलाधिकारी होता है।
    • श्रृंगाटक योग: जब समस्त ग्रह 1, 5 व 9वें स्थान में हों तो श्रृंगाटक योग बनता है। इस योग वाला जातक सैनिक, योद्धा, कलहप्रिय, राजकर्मचारी, सुन्दर पत्नी वाला एवं कर्मठशील होता है। वीरता के कार्यो में इसे सफलता प्राप्त होता है। इस जातक का 23वें वर्ष में भाग्योदय होता है।
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      English summary
      According to Vedic Astrology, the nature of a person depends on his/her birth date (tithi), day (vaar), moon sign (Rashi) and Yog. Here is Astrological Yog and its benefits.

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