Gemstones: पुरुषों की यौवन शक्ति बढ़ाता है अम्बेर
नई दिल्ली। काम की अधिकता और भागदौड़भरी लाइफ में दांपत्य जीवन बहुत प्रभावित हो रहा है। पति-पत्नी एक-दूसरे को वक्त नहीं दे पाते इस कारण उनमें एक-दूसरे के प्रति अरुचि की भावना पैदा हो रही है। इससे यौन सुख भी बहुत अधिक प्रभावित हो रहा है। लेकिन हमारे ज्योतिष और रत्न विज्ञान में ऐसे अनेक उपाय बताए गए हैं, जिनके माध्यम से हर प्रकार की समस्याओं से मुक्ति पाई जा सकती है। रत्न विज्ञान एक अद्भुत विज्ञान है। यह विभिन्न रंगों के चमकीले पत्थरों के माध्यम से जीवन की विभिन्न परिस्थितियों को हैंडल करने और उत्पन्न समस्याओं से छुटकारा पाने में हमारी मदद करते हैं।

शारीरिक स्वास्थ्य
विभिन्न प्रकार के रत्न धारण करने से व्यक्ति के सुख-सौभाग्य में वृद्धि, समृद्धि के साथ-साथ उत्तम शारीरिक स्वास्थ्य भी प्राप्त होता है। आज हम एक ऐसे दुर्लभ उपरत्न की बात कर रहे हैं जो व्यक्ति के लिए भाग्यशाली तो होता ही है, उसके पौरुष बल में भी वृद्धि करता है। यह उपरत्न है अम्बेर। इसे तृणमणि, कर्पूर, तृणाकर्ष भी कहा जाता है। यह अति प्राचीन समय की वनस्पतियों से निकला हुआ गोंद जाति का पदार्थ है जो समय के प्रभाव से भूगर्भ में पत्थर की तरह कठोर और चमकदार बन गया है। पत्थर जाति के रत्नों की तरह इसमें भी चमक होती है, लेकिन यह वजन में बहुत हल्का होता है। इसमें कर्पूर की तरह गंध आती है इसलिए इसे कर्पूर भी कहा जाता है। अम्बेर को रेशमी कपड़े से रगड़ने पर विद्युतीय शक्ति पैदा होती है और तिनके को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है।

अम्बेर पहनने के लाभ
- अम्बेर को धारण करने से पुरुष की यौवन शक्ति में वृद्धि होती है।
- यह वीर्य वर्धक है, इसलिए उत्तम संतान की प्राप्ति में सहायक होता है।
- इससे पहनने से पुरुष के वीर्य में शुक्राणुओं की वृद्धि होती है।
- यह हृदय रोगों में लाभ पहुंचाता है। यदि हृदय रोग नहीं है तो इसे धारण करने से हृदय रोग की आशंका कम हो जाती है।
- यह हृदय की अनियंत्रित धड़कनों को नियंत्रित करता है।
- स्त्रियों में रक्त, पित्त, प्रदर, खूनी बवासीर, आंतों की कमजोरी दूर करता है।
- त्वचा संबंधी रोगों को ठीक करके घाव शीघ्रता से भरता है।
- पीलिया होने पर इसे धारण किया जा सकता है। व
- स्त्रियों के लिए इसे धारण करना सौभाग्यसूचक है।

कैसे पहचाने अम्बेर
अम्बेर लाल, पीले और सफेद रंग में पाया जाता है। इसे जब हथेलियों के बीच में रखकर रगड़ा जाता है तो कपूर जैसी गंध आती है। अगर बाल या रेशे पर इससे स्पर्श करवाया जाता है तो यह चुंबक की भांति उन्हें अपनी ओर खींच लेता है। यदि इसे आग के समीप रखा जाए तो मोम की तरह गंध छोड़ता हुआ जलने लग जाता है।












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