'कहीं तो होगी जमकर बारिश तो कहीं पर 1 बूंद के लिए तरसेंगे लोग'
लखनऊ। जब सूर्य के राहु के नक्षत्र आर्दा में प्रवेश करता है तो लगभग उसी समय से भारत के प्रान्तों में वर्षा का आगमन ग्रहगोचर के अनुसार माना गया है। ज्योतिष शास्त्रानुसार वर्षा, वायुमण्डल, समुद्री तूफान एवं चक्रवाति आदि प्राकृतिक उत्पातों का विचार सूर्य के आर्दा प्रवेश, रोहिणीवास एवं गोचर ग्रह स्थिति पर निर्भर करता है। अतः सर्वप्रथम सूर्य की आर्दा प्रवेश कालीन कुण्डली के आधार विचार करते है।

ज्येष्ठ शुक्ल दशमी....
संवत् 2075 ज्येष्ठ शुक्ल दशमी दिन शुक्रवार तदनुसार 22 जून सन् 2018 ई0 को चित्रा नक्षत्र, परिध योग एवं कन्या में चन्द्रमा के समय दिन में 11 बजकर 10 मि0 के लगभग सूर्य आर्दा नक्षत्र में प्रवेश कर चुके है।सूर्य का आर्दा नक्षत्र में प्रवेश दिन में होने के कारण अनेकत्र वर्षा का अवरोध है एवं दुर्भिक्ष की स्थिति बन रही है।

आर्दा प्रवेश कुण्डली
सर्वलोकाश्च भूपाश्च सन्तुष्टा स्युस्तदा भृशम्।
आर्दा प्रवेश कुण्डली में कर्क में शुक्र, राहु, मकर में मंगल व केतु। गुरू तुला में होने से जलचर राशियां की ग्रहस्थिति अनुकूल नहीं है। अतः असम, महाराष्ट्र, उड़ीसा, बंगाल व कर्नाटक आदि में कहीं भयंकर बाढ़ आदि प्राकृति प्रकोप से भयंकर हानि या कहीं अकाल की स्थिति भी बन सकती है।

संवत् का राजा सूर्य
इस संवत् का राजा सूर्य होने अनेक क्षेत्रों में वर्षा न होने व जलवायु परिवर्तन की प्रतिकूलता से खड़ी फसलों को हानि पहुंचेगी। लेकिन इस वर्ष का मेघेश शुक्र होने से कहीं-कहीं वर्षा के संकेत भी अच्छे है। चतुर्मेघों में इस वर्ष पुष्कर नामक मेघ है-पुष्करे मन्दवृष्टिः स्यात अर्थात इस वर्ष में वर्षा की कमी से अनेक प्रान्त दुर्भिक्ष से ग्रस्त रहेंगे।

‘प्रवह' नामक वायु
अवाह आदि सप्तवायु-विचार से इस वर्ष ‘प्रवह' नामक वायु है। परिणाम स्वरूप, अनेक आंधी-तूफान, भूकम्प हो और कुछ प्रान्त बाढ़ की अधिकता से परेशान रहेगें।इस वर्ष ‘वायुस्तम्भ' 66 प्रतिशत है होने से बादलों का संचालन बिगड़ेगा एवं वैश्विक तापमान आगामी वर्षो में भयंकर स्थिति बनायेगा। जुलाई माह में बुध और शुक्र के समीप आने से 14 से 25 जुलाई और 29 व 30 जुलाई में वर्षा के प्रबल योग उत्तर प्रदेश में बन रहे है।












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