जानिये घर में वास्तु दोष के लक्षण
इस धरती पर दो प्रकार की ऊर्जायें है नकारात्मक और सकारात्मक। वास्तु का पूरा सिद्धान्त इन्हीं दो ऊर्जाओं पर टिका हुआ है। भवन से नकारात्मक ऊर्जा को निकाला जाता है एंव सकारात्मक ऊर्जा को घर में प्रवेश करने का उपाय बताया जाता है। यही वास्तु शास्त्र का सिद्धान्त है।

आइये जानते है कुछ ऐसे लक्षण जिन्हें देखकर आप जान सकते है कि घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास है या नहीं?
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- दरवाजे/खिड़की खोलते या बन्द करते समय आवाज नहीं करने चाहिए। क्योकि वास्तु के अनुसार इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। दरवाजों व खिड़कियों के कब्जों में तेल डालना चाहिए।
- अगर घर में विद्युत सम्बन्धी उपकरणों जैसे-पंखे, कूलर आदि में कर्कश आवाज आती है तो इनकी मरम्मत कराके ठीक अवश्य कराना चाहिए।
- अगर घर में जल का प्रवाह ठीक से न हो रहा हो या फिर टोटियों से पानी टपकता हो तो इससे भी नकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। ईशान कोण में जेट पम्प या पानी की टंकी नहीं रखनी चाहिए। टंकी को उत्तर या पूर्व दिशा में ही रखना चाहिए।
- यदि घर की पूर्व व उत्तर दिशा उॅची हो ओर पश्चिम व दक्षिण दिशा नीची हो तो उस घर में आये दिन झगड़ा होता है और आर्थिक समस्यायें बनी रहती है।
- घर में कम से कम वर्ष में दो बार विधिवत हवन जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से भवन में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
- घर का वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) ऊॅचा होने पर शत्रुओं की संख्या में वृद्धि होती एंव दुर्घटनायें होती रहती है।
- यदि किसी घर का दक्षिण व आग्नेय नीचा हो और उत्तर व वायव्य कोण ऊॅचे हो तो ऐसे घर का मालिक कर्ज एंव बीमारियों के कारण मानसिक रूप से परेशान रहता है।
- जिस घर का नैऋृत्य कोण और दक्षिण निचला हो और ईशान व उत्तर ऊॅचा हो तो ऐसे घरों के मालिक शराब व अन्य व्यसनों में अपना धन बर्बाद करता है जिससे घर की आर्थिक ठीक नहीं रहती है।
- यदि आप दो मंजिला मकान बनवाना चाहते है, तो पूर्व एंव उत्तर दिशा की ओर भवन की ऊॅचाई कम रखें इससे भवन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी।
- भवन में पूर्व व उत्तर दिशा में ही दरवाजे व खिड़कियां रखनी चाहिए। दक्षिण व पश्चिम दिशा में भूलकर भी खिड़कियां नहीं रखनी चाहिए।












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