2015 में शनि की मजबूत एवं अशांत ऊर्जा का भारत पर प्रभाव
पिछले लेख (Click on Previous) में हमने पढ़ा कि साल 2015 में भारत पर किस प्रकार की आपदाओं के आने की आशंका बनी हुई है। अब हम बात करेंगे इस ग्रह की अशंत ऊर्जा की। साल 2015 में शनि वृश्चिक राशि में चलायमान रहेगा। इस दौरान 14 मार्च से 15 अगस्त 2015 तक शनि की स्थिति वक्रीय रहेगी।
इस ज्योतिषीय आंकलन के अनुसार भारत में निम्न चीजें हो सकती हैं-
- शनि के प्रभाव के कारण भारत को सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में असफलताएं देखनी पड़ सकती हैं।
- स्वच्छता से संबंधित मुद्दों पर शनि का प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
- बढ़ता प्रदूषण कुछ गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है।
- प्रदूषित पानी और हवा के अलावा स्वच्छ पानी की कमी एक बड़ा मुद्दा बनेगी।
- आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों के क्षेत्र में खोज कुपोषित लोगों के पोषण में सुधार करने में मदद कर सकती है।
- देश में कैंसर, एड्स और अन्य खतरनाक बीमारियों के इलाज हेतु टीका क्षेत्र में उत्साहजनक उन्नति देखने को मिल सकती है।
वर्ष 2015 के दौरान शनि वृश्चिक एवं राहु कन्या राशि में रहेगा जबकि वर्ष की पहली छमाही में गुरू कर्क राशि के बीच से गुजरेगा जबकि दूसरी छमाही के दौरान गुरू सिंह राशि के बीच से पारगमन करेगा। 20 मार्च 2015 तथा 13सि तंबर 2015 को सूर्य ग्रहण लगेगा एवं चंद्रमा ग्रहण 4 अप्रैल 2015 व 24 सितंबर 2015 को लगेगा, जो कुल मिलाकर पूरे विश्व को प्रभावित करेगा।
शनि की मजबूत एवं अशांत ऊर्जा संकेत निम्न बातों के संकेत दे रही है-
- शक्तिशाली आपराधिक समूहों व राजनीतिक प्रतिष्ठानों के बीच गठजोड़ हो सकता है।
- देश में भ्रष्टाचार में वृद्घि, अस्थिरता एवं आर्थिक तंगहाली का सामना करना पड़ सकता है।
- राजनीतिक मामलों में विश्वासघात होने के संकेत भी मिल रहे हैं।
- राहु बुध के अधिकार वाली राशि में है, जो आतंकी वारदातों के बढ़ने के संकेत देता है।
- आतंकवादी रणनीति अत्यधिक परिष्कृत हो जाएगी और हिंसा फैल सकती है।
- जैविक और रासायनिक हथियारों का खतरा बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
पंडित दयानंश शास्त्री का संपर्क सूत्र- [email protected], मो. 09669290067 (मध्य प्रदेश) एवं 09024390067 (राजस्थान)।













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