आईएसआईएस की कुडली- कब, कैसे और कौन करेगा इसका अंत?

इस्लामिक स्टेट ऑफ ईरान एंड सीरिया (आईएसआईएस) के नाम से आप जरूर वाकिफ होंगे। जिस बेदर्दी के साथ ये सिर कलम करते हैं, जिस बेदर्दी के साथ लोगों को लाइन से खड़ाकर मौत के घाट उतार देते हैं, हर चीज से आप वाकिफ होंगे। कहीं न कहीं सोचते होंगे, भगवान न करे कि कभी भारत पर हमला करने में ये सफल हों। लेकिन क्या आपने कभी ज्योतिष की दृष्टि से आईएसआईएस को देखा है? शायद नहीं!

चलिये एक नजर डालते हैं इस आतंकी संगठन पर। और देखते हैं कि आईएसआईएस नाम के इस दैत्य का अन्त कब और कैसे होगा?

29 जून, 2014 का दिन पूरी दुनिया के लिए एक विस्फोटक उद्घोष लेकर आया। इसी दिन स्थानीय समयानुसार 19: 54 बजे ईराक के मोसूल शहर से अबू-बकर-अल-बगदादी ने अपने आपको मुस्लिम जगत का "खलीफा" घोषित कर दिया। इसी समय को इस्लामिक स्टेट का जन्म समय माना जा सकता है। यह वो समय है जब मोसुल में धनु लग्न उदित हो रही थी। लग्नेश गुरु अष्टम भाव में चन्द्रमा के साथ उच्च का होकर बैठा था।

मंगल बना रहा आईएसआईएस को विस्फोटक

पराक्रमेश शनि मारकेश होकर लाभ भाव में उच्च अवस्था में राहु के साथ बैठा था। पंचमेश युद्ध प्रिय ग्रह मंगल के साथ सम्-सप्तक योग बना रहा था। पंचम भाव में स्थिति केतु मारकेश शनि से परस्पर दृष्टि सम्बन्ध बना रहा है। सप्तम भाव में स्थित नवमेश सूर्य एंव सप्तमेश बुध लग्न पर दृष्टिपात कर रहे थे। दशम भाव में बैठे युद्ध प्रिय ग्रह मंगल की सप्तम दृष्टि आन्दोलन एंव क्रान्तिकारी भाव के संकेतक चतुर्थ भाव पर पड़ रही थी। मंगल की यह स्थित आईएसआईएस को और अधिक विस्फोटक बना रही है।

अमेरिका के प्रयास होंगे असफल

लग्नेश, अष्टमेश चन्द्र पर शनि दृष्टि इन सभी के विश्लेषण से अनुमान लगाया जा सकता है कि आईएसआईएस का जन्म अल्पायु योग में हुआ है। यह कुण्डली अल्प आयु योग की है, किन्तु अत्यन्त बलवान एंव आन्दोलनकारी भविष्य भी दर्शाती है। अमेरिका एंव नाटो द्वारा एक लम्बे एंव धीमे युद्ध की योजना आईएसआईएस को निष्क्रिय करने के लिए बनाई जा रही है।

कुण्डली में ग्रह योग ऐसे संकेत दे रहें है कि इस प्रकार की दीर्घ अवधि वाली बलहीन योजना आईएस को समाप्त नहीं कर पायेगी। इस दैत्य के दमन के लिए विश्व शक्तियों को एक घातक एंव मारक युद्ध का शीघ्र शंखनाद करना होगा।

आईएसआईएस मानता है भारत को अपना सबसे बड़ा दुश्मन

आईएस की लग्न धनु है और भारत की लग्न वृष है। आईएस की जन्म कुण्डली में वृष लग्न छठें भाव में पड़ रही है। छठा भाव शत्रु का संकेतक भाव है। जिस कारण आईएस भारत को अपना सबसे बड़ा शत्रु मान रहा है।

भारत को छेड़ा तो मुसीबत में पड़ जायेगा ISIS

समाचार पत्रों में ऐसी खबरे भी आयी है कि आईएस भारत पर कोई बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। कुण्डली के ग्रह भी संकेत कर रहें है, आईएस से भारत को विशेष सावधानी बरतनें की आवश्यकता है। अन्यथा भयावह स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन यदि आईएस ने भारत को छेड़ा तो समझो उसी दिन से आईएसआईएस के पतन की उल्टी गिनती शुरू हो जायेगी। क्योंकि आईएस की जन्म लग्न धनु है जो भारत की कुण्डली में अष्टम भाव में पड़ी है। अष्टम भाव विनाश व मृत्यु का संकेतक भाव है।

अप्रैल 2016 तक बड़े आतंकी हमले का खतरा

भारत की कुण्डली में वर्तमान में चन्द्र की महादशा में चन्द्र का अन्तर चल रहा है। चन्द्र की राशि कर्क जो कुण्डली में पराक्रम भाव में पड़ी है, इसलिए भारत अपने पराक्रम व साहस के बल पर आतंकवादियों के द्वारा किये गये हमलों को असफल करने में कामयाबी पा रहा है। 20 सितम्बर 2015 से चन्द्र में मंगल का अन्तर शुरू हो रहा है। मंगल ग्रह कुण्डली में मारकेश और द्वादशेश है। 20 सितम्बर 2015 से 20 अप्रैल 2016 तक मंगल का प्रत्यन्तर चलेगा। इस कार्यकाल में भारत को आतंकवादी खतरों से विशेष रूप से सावधानी बरतनें की आवश्यकता नजर आ रही है। इस दौरान बड़े हमले का खतरा है।

ज्योतिष के आधार पर क्या निकला निष्कर्ष?

आईएसआईएस अगस्त 2016 तक रक्तपात का खूनी खेल बेखौफ होकर खेलता रहेगा। अमेरिका, भारत, इंग्लैण्ड, रूस, अफगानिस्तान, तुर्कीस्तान व अरब आदि देश सैन्य गठबन्धन करके एक साथ आईएसआईएस के विरूद्ध युद्ध नीति बनाकर काले ध्वज वाले इस प्रेत का 2016 के अन्त या 2017 के मध्य तक वध करने में सफल होंगे। इस सफलता में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। दूसरे शब्दों में कहें तो भारत ही आईएसआईएस का खात्मा करेगा।

यदि आपको ज्योतिष के इस आंकलन पर जरा भी विश्वास हुआ है, तो इस आर्टिकल को जरूर शेयर करें फेसबुक व ट्व‍िटर पर।

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