जानिए क्या है ओम मंत्र की खासियत?
मन पर नियन्त्रण करके शब्दों का उच्चारण करने की क्रिया को मन्त्र कहते है। मन्त्र विज्ञान का सबसे ज्यादा प्रभाव हमारे मन व तन पर पड़ता है। मन्त्र का जाप एक मानसिक क्रिया है। कहा जाता है कि जैसा रहेगा मन वैसा रहेगा तन। यानि यदि हम मानसिक रूप से स्वस्थ्य है तो हमारा शरीर भी स्वस्थ्य रहेगा। मन को स्वस्थ्य रखने के लिए मन्त्र का जाप करना आवश्यक है। ओम् तीन अक्षरों से बना है। अ, उ और म से निर्मित यह शब्द सर्व शक्तिमान है। जीवन जीने की शक्ति और संसार की चुनौतियों का सामना करने का अदम्य साहस देने वाले ओम् के उच्चारण करने मात्र से विभिन्न प्रकार की समस्याओं व व्याधियों का नाश होता है।

- कम से कम 108 बार ओम् का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव रहित हो जाता है। कुछ ही दिनों पश्चात शरीर में एक नई उर्जा का संचरण होने लगता है।
- यदि आपको घबराहट व बैचेनी बनी रहती है तो आप प्रातःकाल ओम् का उच्चारण करने चमत्कारिक लाभ पायेंगे। ह्रदय रोगियों के लिए ओम् का उच्चारण करना अतयन्त फायदेमन्द है।
- ओम् के उच्चारण करने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकल जाते है और मन तनाव रहित हो जाता है। यह ह्रदय और रक्त के प्रवाह को सन्तुलित रखता है। ओम् का उच्चारण करने से पाचन शक्ति सुदृढ़ बनी रहती है।
- ओम् का उच्चारण करने से नींद न आने की समस्या शीघ्र ही दूर हो जाती है। मानसिक रूप से विकृत लोग ओम् का उच्चारण अवश्य करें।
- ब्लड प्रेशर व शुगर रोगी यदि नियमित रूप से प्रातःकाल कम से कम 108 बार ओम् का उच्चारण करें तो उनका रोग नियन्त्रण में रहेगा।
- ओम् का उच्चारण करने से प्रकृति के साथ बेहतर तालमेल और नियन्त्रण स्थापित होता है। जिसके कारण हमें प्राकृतिक उर्जा मिलती रहती है।
ओम् का उच्चारण करने से परिस्थितियों का पूर्वानुमान होने लगता है। - ओम् का उच्चारण करने से आपके व्यवहार में शालीनता आयेगी जिससे आपके शत्रु भी मित्र बन जाते है।
- ओम् का उच्चारण करने से आपके मन में निराशा के भाव उत्पन्न नहीं होते है। आत्म हत्या जैसे विचार भी मन में नहीं आते है।
- जो बच्चे पढ़ाई में मन नहीं लगाते है या फिर उनकी स्मरण शक्ति कमजोर है। उन्हें यदि नियमित ओम् का उच्चारण कराया जाये तो उनकी स्मरण शक्ति भी अच्छी हो जायेगी और पढ़ाई में मन भी लगने लगेगा।












Click it and Unblock the Notifications