18 अप्रैल से 25 मई 2014 के बीच दिल्ली में दोबारा होंगे चुनाव

दिल्ली की नाम राशि मीन है, जो एक द्विस्वभाव राशि है। इस राशि का मतलब दुबिधाजनक सिथतियों को उत्पन्न करना। राजनीति में वैसे तो सभी ग्रहों का रोल रहता है, किन्तु नेतृत्व एंव राजा के लिए गुरू, सूर्य व मंगल की अहम भूमिका होती है। वर्तमान में गोचर की सिथति कुछ इस प्रकार है। लग्नेश गुरू 7 नवम्बर से वक्री होकर विपक्ष के संकेतक भाव चुतर्थ में मिथुन राशि में भ्रमण कर रहा है। इस कारण दोनों पार्टिया उपरी मन से विपक्ष में बैठने के लिए तैयार है।
26 नवम्बर 2013 को मंगल ने कन्या राशि में प्रवेश किया है, जिसकी सप्तम दृषिट दिल्ली की राशि मीन पर पड़ रही है और चतुर्थ नजर राज्य भाव के कारक भाव दशम पर पड़ रही है। सूर्य षष्ठेश होकर वृशिचक राशि में गोचर कर रहा है। सूर्य राज्य एंव राजा का कारक है और वह 15 दिसम्बर 2013 को राति्र 2:27 मि0 पर धनु राशि में संक्रमण करेगा। सूर्य राजा है तो मंगल सेनापति का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए दिल्ली पर इन दोनों का विशेष प्रभाव दिखार्इ दे रहा है।
सूर्य 16 दिसम्बर से राज्य के कारक भाव दशम पर भ्रमण करना शुरू कर देगा उस समय सेनापति मंगल की चतुर्थ दृषिट सूर्य पर अपना आधिपत्य स्थापित करेगी और साथ में दिल्ली की लग्न पर भी अपना प्रभुत्व प्रबलता से बनायें रखेंगी। जिस कारण 16 दिसम्बर से दिल्ली राजा के प्रभुत्व से वचिंत होकर सेनापति के आधाीन हो सकती है अर्थात राष्ट्रपति शासन लगने की सम्भावना नजर आ रही है और 18 अप्रैल से 25 मर्इ के मध्य दिल्ली विधान सभा के दोबारा चुनाव हो सकते है।












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