आपकी हर मनोकामना पूर्ण करेंगे रामचरित मानस के ये मंत्र
[पं. अनुज के शुक्ल] गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित्र मानस में मर्यादा पुरूषोत्तम राम जी का चरित्र-चित्रण राममय होकर बहुत बेहतरीन ढ़ग से किया है। रामचरित मानस सिर्फ एक धार्मिक ग्रन्थ ही नहीं है, बलिक समाज का दर्पण है। तुलसीदास ने समाज का गहरा अध्ययन कर समाज की कुरीतियों, बुरार्इयों, अपराधबोध व पाखण्डपन आदि पर मजबूत प्रहार किया है और साथ में आने वाले समाज को एक नयी दिशा देने की भी भरसक कोशिश है।
मैं यहा पर रामचरित मानस के कुछ मंत्रों का उल्लेख कर रहा हू जिन्हे यदि विधिपूर्वक जाप करेंगे तो आपकी विभिन्न प्रकार की भौतिक मनोकामनायें पूर्ण होंगी।
विधि- किसी भी शुभ समय में अथवा नवराति्र में आप घर में ही किसी एकान्त स्थल को साफ करके आटे से अष्टदल बनायें। उसके मध्य एक स्वासितक का चिन्ह बनाकर उस पर बाजोट रखकर लाल वस्त्र बिछायें। प्रभु राम की तस्वीर को स्थान दें। बगल में रामरक्षाकवच यंत्र स्थापित करें। रोली से तस्वीर व यन्त्र पर तिलक लगायें। शुद्ध देशी घी का दीपक जलाकर रूद्राक्ष की माला से सामथर्य अनुसार मन्त्र जाप करें।
अनितम अर्थात नवें दिन आपने जिस मंत्र का जाप किया है, उसका दशांश हवन करें। तत्पश्चात ब्राहम्णों को भोजन कराकर दक्षिणा दें। अगर आप हवन, पूजन आदि नहीं कर सकते हैं, तो शांत कमरे में बैठकर भगवान राम को याद करें और अपनी समस्या के अनुसार मंत्र को चुनें और उसका जाप करें। कुछ समय में ही आपको चमत्कारिक लाभ मिलेगा।

नौकरी प्राप्ति के लिए
बिस्व भरन पोषन कर जोर्इ।
ताकर नाम भरत अस होर्इ।।

बीमारी लग गई है तो
दैहिक दैविक भौतिक तापा
राम राज नहिं काहुहि व्यापा।।

धन प्राप्ति के लिए
जिमि सरिता सागर महुं जाही।
जधपि ताहि कामना नाहीं।।

कुछ खो गया है तो
गर्इ बहोर गरीब नेवाजू।
सरल सबल साहिब रधुराजू।।

विधा प्राप्ति के लिए
गुरूगृह गये पढ़न रधुरार्इ।
अल्पकाल विधा सब पार्इ।।

ज्ञान प्राप्ति के लिए
छिति जल पावक गगन समीरा।
पंच रचित अति अधम सरीरा।।

शादी नहीं हो रही तो
तब जनक पाइ बसिष्ठ आयसु ब्याह साज संवारि कै।
मांडवी श्रुतिकीरित उरमिला कुंअरि लर्इ हंकारि कै।।

संतान प्राप्ति के लिये
प्रेम मगन कौसल्या निसि दिन जात न जान।
सुत सनेह बस माता बालचरित कर ज्ञान।।

मुकदमे में विजय के लिए
पवन तनय बल पवन समाना।
बुधि विवके बिग्यान निधाना।।

परीक्षा में सफलता हेतु
जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी।
कबि उर अजरि नचावहि बानी।।

प्रसिद्धि पाने के लिए
साधक नाम जपहिं लय लाएं।
होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।।

मनोकामना पूर्ण करने के लिये
भव भेषज रधुनाथ जसु सुनिंह जे नर अरू नारि।
तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करिह ति्रसरारि।।












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