अखिलेश यादव के मंत्रीमंडल पर ग्रह-नक्षत्रों का दुष्प्रभाव
लखनऊ (पं. अनुज के शुक्ल)। उत्तर प्रदेश सरकार में पिछले नवंबर से उथल-पुथल चल रही है। कई मंत्री अपने पद पर टिक नहीं पा रहे हैं। बिगड़ती कानून व्यवस्था व अन्य बातों को ध्यान में रखते हुए अखिलेश यादव मंत्री मंडल में विस्तार करने जा रहे हैं। साथ ही कुछ फेरबदल भी। क्या आपको मालूम है, पिछले कई महीनों से चल रही उथल-पुथल के पीछे ज्योतिषीय कारण भी हैं। जी हां कुछ ग्रह-नक्षत्र इस समय मुख्यमंत्री के साथ नहीं हैं।
तकदीर के आगे तरकीब नतमस्तक है। काफी जोड़-तोड़ के बाद सरकार से लाल बत्ती मिलते ही 'माननीयों' के ऊपर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। अब बात करते हैं, उत्तर प्रदेश के कुछ मंत्रियों की जिन्हें लाल बत्ती मिलते ही संकटों ने घेर लिया। सर्वप्रथम विनोद कुमार सिंह उर्फ पडिंत सिंह, जो गोंडा जिले के विधायक हैं। उन्हे राज्य मंत्री बनाया गया था, लेकिन संविदा के आधार पर भर्ती में स्थानीय सीएमओं से ऐसी तीखी नोक-झोक हुयी कि उन्हे इस्तीफा देना पड़ा।
दूसरे प्रकरण में नटवर गोयल को उत्तर प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाकर उन्हे राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया, किन्तु लाल बत्ती मिलते ही वे एक मीडिया कर्मी से ऐसे उलझे कि लाल बत्ती छिनी और जेल की हवा भी खानी पड़ी। तीसरे प्रकरण में साहब सिंह सैनी को प्रमाणीकरण निगम का अध्यक्ष बनाकर उन्हे कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला। लाल बत्ती का सुख भोगे हुये कुछ ही दिन व्यतीत हुये थे कि उनकी पहली पत्नी ने देहरादून में उनके खिलाफ कानूनी कारवाई शुरू कर दी। अब शासन उनको लेकर असमंजस में है।
चौथा प्रकरण उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान के उपाध्यक्ष के तौर पर राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त केसी पाण्डेय का है। लाल बत्ती मिलने के दूसरे दिन ही पशु तस्करों की मद्द करने के मामलें में केसी पाण्डेय मुश्किलों से घिर गये है। पांचवे प्रकरण में आगरा जिले के पंचायत अध्यक्ष गणेश यादव को जैसी ही लाल बत्ती का राजयोग नसीब हुआ कि उनके पुत्र को एक दुराचार के मामलें में गिरप्तार कर लिया गया है।
अब सवाल यह उठता है कि लाल बत्ती मिलते ही विपत्तियों के चक्रव्यूह में फंस जाना क्या आकाशीय ग्रहों का दुष्प्रभाव है?
ऊर्जा का प्रमुख संचालक सूर्य, राज्य, सरकार तथा लाल बत्ती का संकेतक ग्रह है। सूर्य राजा का प्रतिनिधित्व करता है एंव शनि न्याय, अनुशासन तथा प्रजा का संकेतक ग्रह है। इन दोनों के सामजंस्य से ही देश व राज्य में न्याय, समानता, ईमानदारी, समृद्धि, रोजगार एंव विकास की गंगा बहेगी। राजा का चुनाव प्रजा करती है और प्रजा ही राजा की सबसे बड़ी अंकेक्षक होती है।
सूर्य और शनि में पिता और पुत्र का सम्बन्ध है, किन्तु आपसी विरोधाभास भी जमकर है। शनि अपराध, अन्याय , दुराचार और भ्रष्टाचार के सख्त खिलाफ है। शनि मन्द गति में चलता है, तो लोगों को सुकून व आनन्द देता है, लेकन जब यह तूफान का रूप लेता है, तो बड़े से बड़ें अत्याचारी, बलात्कारी व भ्रष्टाचार रूपी पेड़ों को जड़ से उखाड़ कर फेक देता है।
नवम्बर 2011 से शनि अपनी उच्च राशि तुला में आया है और यह 2 नवम्बर 2014 तक इसी राशि में भ्रमण करेगा। तुला राशि न्याय, प्रभुत्व और संवेदनाओं की सूचक है। जब-तक शनि अपनी उच्च राशि तुला में भ्रमण करेगा तब-तक राजयोग एंव लाल बत्ती का सुख भोगने वाले 'माननीय' किसी भी प्रकार भ्रष्टाचार, अनाचार, दुराचार एंव अपराध करेंगे तो शनि के अनुशासन की लाठी से बच नहीं पायेंगे।













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