आत्मघाती प्रयासों को विफल करता है चार मुखी रुद्राक्ष

1- चारमुखी रूद्राक्ष आत्मघाती प्रयासों को विफल करने में सक्षम होता है।
2- सिर दर्द, पागलपन, तनाव क्रोध आदि सभी प्रकार की समस्याओं को दूर करने में चारमुखी रूद्राक्ष कारगर सिद्ध होता है।
3- नकारात्मक सोंच, मायूसी, आलस्य, कायरता आदि अनेक प्रकार की व्याधियों को समाप्त कर जीवन सुखमय बनाता है।
4- चारमुखी रूद्राक्ष को शरीर में धारण करने से आत्म-विश्वास एंव संकल्प शक्ति बलवती होती है।
5- बुध ग्रह से जनित दोषों को दूर करने में चारमुखी रूद्राक्ष को धारण करने से लाभकारी परिणाम मिलते है।
6- व्यापार व व्यवसाय में प्रगति के लिए चारमुखी रूद्राक्ष को पूजन कक्ष में रखकर नित्य पूजन करने से लाभ मिलता है।
7- पत्रकार, लेखक, सम्पादक, प्रकाशन, कवि, आदि के पेशे से जुड़ लोगों के लिए चारमुखी रूद्राक्ष पहनना फायदेमन्द होता है।
8- जिन बच्चों का पढ़ने में मन नहीं लगता, उन्हे चारमुखी रूद्राक्ष को लाल धागे में शुद्ध करके गले में धारण करना चाहिए।
धारण विधि- किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी दोनों दिन शिवलिंग से स्पर्श कराते हुए चारमुखी रूद्राक्ष को शिवलिंग के समीप रखकर "नमः शिवाय" मन्त्र से शिवलिंग तथा रूद्राक्ष दोनों को एक साथ स्नान करायें। तथा चन्दन, धूप, दीप से पजन करके, कुश से रूद्राक्ष को जल से अभिसिंचित करते हुये निम्न मन्त्र का 11 बार का उच्चारण करते हुए दोनों दिन
ॐ अपेहि मनसस्पतेयक्राम परश्चर।
परोनिर्ऋत्या आ चक्ष्व बहुधा जीवितो मनः।।
जलाभिषेचन करने के बाद पूर्णिमा के दिन निम्न मन्त्र- ॐ हौं जूं सः माम् पालय पालय'' से 10' बार आहूतियां दें। हवन के पश्चात ' नमः शिवाय जपते हुए रूद्राक्ष को हवन कुण्ड की 7 बार परिक्रमा लगाकर धारण करना चाहिए।












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