अनशन पर क्या कह रहे हैं अन्ना हजारे के ग्रह-नक्षत्र
विरोध का मुख्य कारण प्रधानमन्त्री को लोकपाल के दायरे से बाहर रखना। अब अन्ना हजारे इसके खिलाफ 16 अगस्त से आमरण अनशन करने के लिये पूरी तरह दृढ़ प्रतिज्ञ हैं। उधर सरकार की भी जिद है कि इस बार अन्ना के नखरे नहीं सहे जायेंगे । अब देखते हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यह स्वतन्त्रता की दूसरी लड़ाई है या फिर 1857 का प्रथम विद्रोह जिसे बलपूर्वक कुचल दिया गया था।
16 अगस्त दिन मंगलवार को समय लगभग प्रातः 10:30 बजे कन्या लग्न के समय अन्ना हजारे दिल्ली में आमरण अनशन पर बैठने जा रहे हैं। इस समय की ग्रह गोचर स्थिति पर एक नजर डालते हैं। कन्या लग्न एक द्विस्वभाव राशि है। जिससे यह प्रतीत हो रहा है कि यह अनशन अपने पहले चरण में काफी सक्रिय रहेगा परन्तु अन्तिम चरण तक पहुंचते-पहुंचते स्थिर हो जायेगा। लग्नेश बुध वक्री होकर द्वादश भाव में स्थित है। इसलिये इसमें युवाओं की भागीदारी का विशेष योगदान होने की सम्भावना है।
द्वितीयेश और भाग्येश शुक्र अस्त होकर अपने शत्रु सूर्य के साथ लाभ भाव में स्थित है। अतः कमेटी के सभी लोग आपस में सहमति बनाकर किसी भी बात को लिखित रूप में पेश करें अन्यथा सरकार अवसर का लाभ उठाने में देरी नहीं करेगी। तृतीयेश मंगल दशम भाव/राज्य भाव में स्थित है और पंचमेश, षष्ठेश शनि प्रथम भाव में स्थित है। जिसकी दशम दृष्टि राज्य भाव पर पड़ रही है। जिसके कारण अन्ना मण्डली अपने साहस का परिचय देते हुये सरकार को नाको चने चबवाने का पूरा प्रयास करेगी।
17 अगस्त को सूर्य प्रातः 11:49 मि0 पर अपनी मूल त्रिकोण राशि सिंह में प्रवेश कर रहा है। और साथ में शुक्र भी सिंह राशि में प्रवेश करेगा। दशम भाव का अधिपति बुध द्वादश भाव में स्थित है तथा अष्टमेश मंगल दशम भाव में स्थित है। इसके प्रभाव से शासक को किसी अवधि विशेष में विपरीत स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। विरोधी विषम स्थिति उत्पन्न कर चुनौती देंगे, अतः शासक को कठोर रणनीति अपनाने के लिये बाध्य होना पड़ेगा।
अतः ग्रह स्थिति यह दर्शाती है कि यह जनलोकपाल विधेयक अयोध्या के राम मन्दिर मुद्दे जैसा हो सकता है। जिसमें अन्ततोगत्वा न्यायपालिका को भी हस्ताक्षेप करना पड़ सकता है।













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