Satna News: राजनीति के मंझे खिलाड़ी निकले गणेश सिंह, विधानसभा हारने के बावजूद पांचवीं बार मिला लोकसभा का टिकट
Satan Lok Sabha Seat BJP Candidate: भाजपा लोकसभा चुनाव में सतना से एक बार फिर गणेश सिंह को टिकट दिया। इसके साथ ही साफ हो गया कि गणेश सिंह राजनीतिक के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। जिन्होंने टिकट को लेकर चल रहे तमाम कयास को दरकिनार करते हुए विरोधियों को एक बार फिर परास्त किया है।
बीजेपी आलाकमान ने विधानसभा में हुई हार को नजरअंदाज करते हुए लोकसभा के लिए अपना भरोसा फिर से जताया है। पार्टी ने गणेश सिंह को इसी साल विधानसभा चुनाव में उतरा था लेकिन उन्हे कांग्रेस के सिद्धार्थ कुशवाहा से हार का मुंह देखना पड़ा था।

गौरतलब है कि सांसद गणेश सिंह को बीजेपी ने विधानसभा चुनाव मैदान पर उतारा था। वह अपनी सीट नहीं निकाल सके। इसके बाद से कयास लगाए जा रहे थे कि हो सकता है पार्टी गणेश सिंह को लोकसभा चुनाव में नहीं उतारे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और एक बार फिर से आलाकमान ने गणेश सिंह पर ही दांव खेला है।
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भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार गणेश सिंह ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में 2 लाख 31 हजार 473 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। उन्हें 5 लाख 88 हजार 753 मत मिले थे जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी राजाराम त्रिपाठी को 3 लाख 57 हजार 280 वोट मिले थे।
इसके पूर्व के चुनावों में गणेश सिंह मप्र के पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ राजेन्द्र कुमार सिंह, पूर्व सांसद स्व सुखलाल कुशवाहा और विंध्य की कांग्रेसी सियासत के छत्र माने जाने वाले पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल को भी चुनाव हारा चुके हैं।
स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त 61 वर्षीय गणेश सिंह कानून से भी स्नातक हैं। वे लॉ कॉलेज के महासचिव व छात्र संघ अध्यक्ष रहे। 1994 में जिला पंचायत सदस्य एवं 1999 में सतना जिला पंचायत के अध्यक्ष बने। वर्ष 2004 में भाजपा के टिकट पर पहली बार सांसद चुने गए। तब से अब तक सतना लोकसभा सीट से संसद सदस्य हैं।
2023 में सतना सीट से विधानसभा चुनाव लड़े लेकिन 4400 वोटों से हार गए। केंद्र की ओबीसी स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन एवं कई केंद्रीय समितियों के सदस्य रह चुके हैं। सिंह भाजपा प्रदेश संगठन में प्रदेश मंत्री और विधानसभा चुनाव प्रबन्ध समिति के सदस्य रहे।
चार बार से सतना लोकसभा सीट से सांसद हैं। ओबीसी वर्ग के बड़े चेहरे, ओबीसी स्टैंडिंग कमेटी के चैयरमैन रहे हैं। सभी 7 विधानसभा क्षेत्रों में समर्थकों की बड़ी तादाद और कार्यकर्ताओं की अपनी टीम है। सजातीय वोटों पर भी अच्छी पकड़ है।












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