Denmark Azan Controversy: 'डेनमार्क में घूमते हुए लगा जैसे इस्लामाबाद आ गया', अज़ान पर परमानेंट बैन की तैयारी
Denmark Azan Controversy: यूरोप की शांत वादियों में अब अजान की गूंज पर 'कानूनी ताला' लगाने की तैयारी चल रही है! आमतौर पर अपनी लिबरल नीतियों के लिए मशहूर डेनमार्क ने अब एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। देश के इमिग्रेशन मंत्री मोर्टन बोडस्कोव ने साफ कर दिया है कि मस्जिदों के लाउडस्पीकर अब बंद हो सकते हैं।
सरकार का मानना है कि देश की मूल सांस्कृतिक पहचान को बचाने और 'बढ़ते इस्लामीकरण' पर ब्रेक लगाने के लिए यह कड़वा घूंट पीना जरूरी हो गया है। हालांकि, फ्रीडम ऑफ स्पीच और मजहबी आजादी के बीच फंसा यह प्रस्ताव अभी कानूनी तराजू पर तोला जा रहा है, लेकिन इसने यूरोप की सियासत में एक नई और तीखी बहस को जन्म दे दिया है।

Denmark loudspeaker Ban: आखिर सरकार अजान पर बैन क्यों चाहती है?
'डेनमार्क की सड़कें डेनमार्क जैसी ही दिखनी और लगनी चाहिए, किसी और मुल्क जैसी नहीं!" - कुछ इसी सख्त मिजाज के साथ डेनमार्क के इमिग्रेशन मंत्री मोर्टन बोडस्कोव ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर अजान रोकने की वकालत की है। मंत्री का मानना है कि देश के कुछ इलाकों में डेमोग्राफिक और सांस्कृतिक बदलाव इतनी तेजी से हुए हैं कि वहां डेनमार्क की अपनी मूल पहचान ही गायब होने लगी है। इसी 'सांस्कृतिक संकट' से निपटने के लिए अब सरकार देशभर में लाउडस्पीकर पर पूरी तरह कानूनी पाबंदी लगाने के रास्ते तलाश रही है। हालांकि, यह फैसला अभी फाइनल नहीं है, लेकिन सरकार ने यह साफ संकेत दे दिया है कि वह अपनी सभ्यता और माहौल से कोई समझौता करने के मूड में नहीं है।
Denmark Mosque Azan Debate: तीसरी बार उठा अजान का मुद्दा
सोशल डेमोक्रेट्स पार्टी पहले भी दो बार मस्जिदों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर सवाल उठा चुकी है। अब तीसरी बार सरकार इस मुद्दे को आगे बढ़ा रही है। मंत्री बोडस्कोव ने कहा कि पूरी योजना तैयार की जा रही है, लेकिन पहले यह देखा जाएगा कि क्या ऐसा कानून डेनमार्क के संविधान के मुताबिक संभव है। फिलहाल अधिकारी धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं की जांच कर रहे हैं।
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डेनमार्क में मुस्लिम आबादी और मौजूदा नियम
करीब 60 लाख आबादी वाले डेनमार्क में लगभग 2.7 लाख मुस्लिम रहते हैं और देश में करीब 100 मस्जिदें हैं। कोपेनहेगन समेत कई इलाकों में पहले से ही शोर-शराबे से जुड़े स्थानीय नियम लागू हैं, जिनकी वजह से लाउडस्पीकर पर अजान सीमित है। यानी हर जगह खुली छूट नहीं है। अगर नया कानून आता है तो यह पूरे देश में एक समान नियम लागू कर सकता है।
इमिग्रेशन पर सरकार का सख्त रुख
डेनमार्क सरकार पिछले कुछ वर्षों से इमिग्रेशन और इंटीग्रेशन नीति को लगातार सख्त बना रही है। सरकार का कहना है कि देश में रहने वाले लोगों को डेनिश समाज और संस्कृति के साथ बेहतर तरीके से जुड़ना चाहिए। इसी सोच के तहत अवैध रूप से रह रहे विदेशियों के खिलाफ भी कार्रवाई तेज की जा रही है। सरकार का मानना है कि सिर्फ बयान देने के बजाय सख्त कानून और प्रभावी कार्रवाई ज्यादा जरूरी है।
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पूरे यूरोप में बढ़ रही इमिग्रेशन पर बहस
डेनमार्क अकेला ऐसा देश नहीं है जहां इमिग्रेशन और धार्मिक पहचान पर बहस चल रही हो। हाल के वर्षों में कई यूरोपीय देशों में भी इमिग्रेशन को लेकर सख्त रुख देखने को मिला है। खासकर मुस्लिम समुदाय, हिजाब और धार्मिक प्रतीकों को लेकर अलग-अलग देशों में नए नियम और राजनीतिक बहस सामने आई हैं। डेनमार्क में भी अजान पर प्रस्ताव इसी बड़ी यूरोपीय बहस का हिस्सा माना जा रहा है। अब सबकी नजर सरकार के अंतिम फैसले पर रहेगी।












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