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Denmark: स्कूल-यूनिवर्सिटी में हिजाब और बुर्का बैन! बढ़ती आतंकी घटनाओं से घबरा रहे हैं देश?

Denmark: सरकार ने बुधवार को ऐलान किया कि वह देश के सभी स्कूलों और विश्वविद्यालयों में चेहरे को पूरी तरह ढकने वाले कपड़ों पर लगे प्रतिबंध को और सख्त करने जा रही है। इसका मतलब यह है कि अब शिक्षा संस्थानों में भी बुर्का, नकाब और ऐसे अन्य कपड़े पहनने की अनुमति नहीं होगी, जो चेहरे को पूरी तरह ढकते हैं। यह कदम 2018 में लागू किए गए उस कानून का विस्तार है, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकने पर रोक लगाई गई थी।

2018 से लागू है सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिबंध

अगस्त 2018 में डेनमार्क ने एक सख्त कानून लागू किया था, जिसके तहत सार्वजनिक जगहों पर चेहरा ढकने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी। इस कानून में बुर्का और नकाब जैसे इस्लामी परिधान भी शामिल थे। इस नियम को तोड़ने पर जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया था। अब सरकार चाहती है कि यही नियम स्कूलों और विश्वविद्यालयों में भी साफ़ तौर पर लागू हो।

Denmark

मंत्री का साफ संदेश: कक्षा में नकाब की जगह नहीं

डेनमार्क के आव्रजन और एकीकरण मंत्री रासमस स्टोकलोंड ने बयान जारी कर कहा, "बुर्का, नकाब या ऐसे कपड़े जो लोगों का चेहरा छिपाते हैं, उनका डेनिश कक्षा में कोई स्थान नहीं है।" उन्होंने आगे कहा कि जब सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकना पहले से प्रतिबंधित है, तो शिक्षा संस्थानों में भी इसे लागू करना स्वाभाविक है। वहीं कयास लगाए जा रहे हैं कि अलग-अलग देशों में बढ़ती आतंकी घटनाएं डेनमार्क की सरकार की घबराहट में बड़ी वजह बन गया है।

फरवरी 2026 में संसद में पेश होगा विधेयक

सरकार इस प्रस्ताव को फरवरी 2026 में डेनमार्क की संसद में विधेयक के रूप में पेश करने जा रही है। इसी तरह का कदम यूरोप के एक और देश ऑस्ट्रिया ने भी उठाया है। ऑस्ट्रियाई संसद ने 11 दिसंबर को एक कानून पारित किया, जिसमें 14 साल से कम उम्र की लड़कियों के स्कूलों में हेडस्कार्फ पहनने पर रोक लगाई गई है।

प्रधानमंत्री पहले ही जता चुकी थीं मंशा

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने जून महीने में ही यह साफ कर दिया था कि वह चेहरे को ढकने पर लगे प्रतिबंध को शिक्षा संस्थानों तक बढ़ाना चाहती हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि स्कूलों और कॉलेजों से प्रार्थना कक्षों को हटाया जाना चाहिए, क्योंकि इससे सामाजिक नियंत्रण और महिलाओं पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।

'लोकतंत्र सर्वोपरि है'

यूरो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री फ्रेडरिकसेन ने कहा था कि कानून में कुछ कमियां हैं, जो शिक्षण संस्थानों में मुस्लिम सामाजिक नियंत्रण और महिलाओं के उत्पीड़न को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने यह भी कहा, "आपको अपने धर्म को मानने और उसका पालन करने का अधिकार है, लेकिन लोकतंत्र सबसे ऊपर है।"

समर्थकों का तर्क

चेहरे को ढकने पर प्रतिबंध का समर्थन करने वालों का कहना है कि इससे आप्रवासी पृष्ठभूमि के मुसलमानों को डेनिश समाज में बेहतर तरीके से घुलने-मिलने में मदद मिलेगी। उनका मानना है कि यह कदम समानता, खुलापन और सामाजिक एकीकरण को मजबूत करेगा।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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