Hyderabad School Kalma Controversy: हैदराबाद के एक प्राइवेट स्कूल से अजीबोगरीब मामला सामने आया है। स्टूडेंट्स के परिजनों ने स्कूल टीचर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दावा किया गया है कि हिन्दू स्टूडेंट्स को कलमा याद करने का होमवर्क दिया गया था। जो लोग नहीं जानते कलमा क्या होता है उन्हें बता दें, कलमा इस्लाम धर्म का एक बुनियादी और पहला सिद्धांत है। इस्लाम मे यह एक तरह के विश्वास का वचन है जिसे पढ़ना हर मुसलमान के लिए अनिवार्य माना जाता है।
अब आते हैं हैदराबाद वाले मामले पर, आरोप है कि दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले एक हिंदू स्टूडेंट को होमवर्क में इस्लाम से जुड़ी धार्मिक प्रार्थनाएं, कलमा और सूरह अल-फातिहा याद करने के लिए कहा गया था। इतना ही नहीं, स्टूडेंट से इन्हें क्लास में सुनाने के लिए भी कहा गया था। इस बात का पता जब बच्चे के घरवालों को लगा तो विवाद शुरू हो गया। परिवार ने स्कूल प्रबंधन से इस पर आपत्ति जताई। मामला बढ़ने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। वहीं, बढ़ते विवाद के बीच स्कूल प्रबंधन ने संबंधित टीचर को नौकरी से हटा दिया है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। ये भी पढ़ें: NEET UG 2026: MBBS की सीटों में बंपर बढ़ोतरी! NMC ने जारी किया 1.36 लाख MBBS सीट का नया मैट्रिक्स "मेरे भतीजे की डायरी में कलमा याद करने का होमवर्क लिखा हुआ था" जिस स्टूडेंट को कथित तौर पर धार्मिक होमवर्क दिया गया था, उसकी रिश्तेदार सुप्रिया गौड़ ने बताया, "कल मैं अपने भतीजे को लेने स्कूल गई थी और मैंने देखा कि उसकी डायरी में जो लिखा था, उसका उस विषय से कोई लेना-देना नहीं था। मैंने देखा कि एक टीचर ने कलमा और सूक्रालफेट पढ़ने के लिए लिखा था। यह बिल्कुल गलत है... अगर आप शिक्षा दे रहे हैं, तो बस वही करें। अलग-अलग धर्मों और अलग-अलग पृष्ठभूमि के छात्र शिक्षा लेने आते हैं। वे अच्छी शिक्षा के लिए आते हैं... कलमा और सूक्रालफेट विषय का हिस्सा नहीं हैं, यह एक धार्मिक किताब है। इसे इसमें न मिलाएं।" उन्होनें आगे कहा, "अगर आप इसे विषय बनाना चाहते हैं, तो कृपया भगवद गीता या बाइबिल को विषय के तौर पर शामिल करें... मैं स्कूल मैनेजमेंट की बहुत आभारी हूं क्योंकि उन्होंने इस पर सख्त कार्रवाई की है। हमने डायरी देखी और अपनी आवाज उठाई। मुझे नहीं पता कि कितने छात्रों की डायरियों में ऐसा हो रहा है..." छात्र के माता-पिता का कहना है कि बिना परिवार की जानकारी और सहमति के किसी दूसरे धर्म से जुड़ी प्रार्थना या धार्मिक पाठ याद करने के लिए कहना सही नहीं है। उनका आरोप है कि इससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। परिजनों का कहना है कि सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन किसी भी छात्र को उसकी इच्छा या परिवार की अनुमति के बिना किसी अन्य धर्म की धार्मिक सामग्री पढ़ने या याद करने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। मामला सामने आने के बाद छात्र के परिवार ने सैदाबाद पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले में लोक अभियोजक (पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) से कानूनी राय मांगी गई है। पुलिस का कहना है कि कानूनी राय मिलने के बाद स्कूल प्रबंधन के खिलाफ लागू धाराओं के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। ये भी पढ़ें: Ghaziabad School Bus Fire: धू-धू कर जलने लगी चलती स्कूल बस, कैसे लगी DPS की बस में आग?परिजनों ने जताई आपत्ति
पुलिस ने शुरू की जांच