vegetable farming : बैंगन-नेनुआ से लाखों रुपये की कमाई, सब्जी के खेत में बूंद-बूंद सिंचाई

सब्जियों की खेती से भी लाखों रुपये कमाए जा सकते हैं। ये साबित किया है छत्तीसगढ़ के किसान ने। ड्रिप इरीगेशन यानी टपक सिंचाई और मल्चिंग तकनीक से बैंगन और तोरई की खेती से किसान राजेश दो लाख रुपये कमा रहे हैं।

दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़), 08 जून : किसी भी चीज की सफल खेती करने के लिए सबसे जरूरी बात सही मौसम में सही फसलों का चुनाव है। इसके अलावा सही तरीके से फसल की खेती करना भी जरूरी है। इसके अलावा सिंचाई और उर्वरकों का सही मात्रा में इस्तेमाल भी अहम कारक हैं। पर्यावरण के साथ हो रहे खिलवाड़ और कहीं बिन मौसम बरसात हो तो कहीं लू जैसी समस्याओं के कारण किसान भाइयों को भयंकर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण फसलें चौपट हो रही हैं। हालांकि, विपरीत परिस्थितियों के बीच भी कई किसानों ने हालात से लड़ने की ठानी, और सफलता के झंडे गाड़े।

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सब्जियों की खेती से लाखों की कमाई
भारत के धरती पुत्रों ने वो कर दिखाया जिसके लिए किसानों को पूरी दुनिया में जाना जाता है। यानी धरती का सीना चीर कर लहलहाती हुई फसल उपजाना, इन किसानों का पेशा ही नहीं धर्म है। छत्तीसगढ़ में बागवानी विभाग के सहयोग से एक किसान ने सब्जियों की सफल खेती (vegetable farming) कर अच्छी कमाई का उदाहरण पेश किया है।

बागवानी विभाग के सहयोग से सफलता
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में आधुनिक तरीके से खेती करने वाले किसान राजेश सब्जियों की खेती से लाखों रुपए कमा रहे हैं। सरकार की ओर से भी कृषि उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने और किसानों को बेहतर मार्केट दिलाने की दिशा में कई प्रयास किए गए हैं। जानकारों की मानें तो किसानों की आय दोगुनी करने में इनोवेटिव फार्मिंग की उल्लेखनीय भूमिका है। बैगन और नेनुआ या तोरई जैसी सब्जी की खेती कर लाखों रुपए कमाने की बात थोड़ी चौंकाने वाली तो लगती है, लेकिन दंतेवाड़ा के किसान राजेश ने इसे सच साबित कर दिखाया है।

आर्थिक स्थिति बेहतर करने की पहल
'धान के कटोरे' के रूप में मशहूर छत्तीसगढ़ अब सब्जियों की खेती में भी अपनी पहचान कायम कर रहा है। दंतेवाड़ा के किसान खुद भी आगे आ रहे हैं। सब्जियों की अच्छी पैदावार हो इसके प्रयास लगातार हो रहे हैं। नई दुनिया की एक मीडिया रिपोर्ट में दंतेवाड़ा में रहने वाले किसान राजेश के हवाले से कहा गया है कि परंपरागत खेती से आधुनिक खेती का चुनाव आर्थिक स्थिति बेहतर करने की पहल है।

दूसरे किसानों को प्रेरित कर रहे राजेश
रिपोर्ट के मुताबिक टेकनार गांव के राजेश खुद आधुनिक खेती करने के अलावा अपने आसपास रहने वाले किसानों को भी आधुनिक खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। बैगन और तोरई जैसी सब्जी की डिमांड काफी अधिक होती है। ऐसे में राजेश ने मार्केट डिमांड को पहचाना और इन दो सब्जियों की खेती से लाखों रुपए की आमदनी की।

ड्रिप इरीगेशन से मिली बेहतर फसल
4 हेक्टेयर खेत में से 2 हेक्टेयर जमीन पर राजेश साग-सब्जी की खेती करते हैं। इसमें छत्तीसगढ़ का हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट उनकी मदद करता है। हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट की ओर से राजेश को टपक सिंचाई पद्धति लगाने में मदद मिली। इसके अलावा राजेश ने मल्चिंग टेक्नोलॉजी भी अपनाई।

मल्चिंग टेक्निक से मजदूरी घटी
राजेश का कहना है कि आधुनिक खेती से पहले साग-सब्जी की खेती में आमदनी अच्छी नहीं थी। अब आधुनिक तकनीक की खेती में खर्च भी कम होता है और आय भी बढ़ी है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मल्चिंग टेक्निक अपनाने वाले राजेश बताते हैं इस विधि से साग-सब्जी का उत्पादन आर्थिक दृष्टिकोण से अधिक फायदेमंद होता है। कम लागत में अच्छी गुणवत्ता वाली फसल तैयार होती है और मजदूरी का खर्च कम होने पर उनका मुनाफा बढ़ जाता है।

तकनीक से पैसों की बचत
मल्चिंग विधि से खेती के फायदों के बारे में राजेश बताते हैं कि खेत में निराई-गुड़ाई की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि खेत में बागवानी वाले काम में मजदूर नहीं लगाने पड़ते। इससे कई तरह की कॉस्ट कटिंग होती है। राजेश का दावा है कि उन्होंने मल्चिंग पद्धति से बैगन और तोरई की खेती से ढाई लाख रुपए कमाए हैं। अपने साथी किसानों से आधुनिक खेती अपनाने की अपील कर राजेश कहते हैं कि किसान भाइयों को हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट की योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए। मल्चिंग विधि से खेती कर किसान बागवानी वाली फसलों से अधिक पैसे कमा सकते हैं। राजेश के एक्सपीरियंस के आधार पर कहा जा सकता है कि किसान आधुनिक खेती से आर्थिक रूप से संपन्न बनेंगे। ऐसे में खेती घाटे का सौदा नहीं रह जाएगी।

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