Agripreneur Dheeraj : पूर्व नौसैनिक किसानी कर बना रोल मॉडल, कठुआ में स्ट्रॉबेरी की खेती
परंपरागत खेती से इतर हॉर्टिकल्चर भी लोकप्रिय हो रहा है। जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान से सटी सीमा के पास पूर्व नौसेना जवान स्ट्रॉबेरी फार्मिंग (strawberry farmer dheeraj) कर रहे हैं। जानिए इनकी सक्सेस स्टोरी
कठुआ, 23 मई : स्ट्रॉबेरी की खेती (strawberry farming) मुनाफा कमाने का अच्छा ऑप्शन है। कई राज्यों में स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे किसानों से प्रेरित होकर लोग अपनी जमीनों पर परंपरागत फसलों के बदले स्ट्रॉबेरी की रोपाई कर रहे हैं। भारतीय नौसेना में सेवा दे चुके धीरज कुमार ने नौसेना के शानदार करियर के बाद हॉर्टिकल्चर का विकल्प चुना। कठुआ के धीरज ने एग्रीप्रेन्योर के रूप में पहचान कायम की है। कठुआ में एलओसी के पास स्ट्रॉबेरी फार्मिंग कर रहे धीरज कुमार (strawberry farmer dheeraj) कई स्थानीय युवाओं को भी रोजगार के अवसर मुहैया करा रहे हैं। जानिए स्ट्रॉबेरी फार्मर धीरज की सफलता की कहानी

पुश्तैनी जमीन पर नए तरीके से खेती
स्ट्रॉबेरी की सफल खेती से एग्रीप्रेन्योर के रूप में पहचान बनाने वाले नौसेना के पूर्व जवान धीरज कुमार का कहना है कि उन्होंने नौसेना से रिटायरमेंट के बाद खेती को करियर बनाने का फैसला लिया। कठुआ के स्ट्रॉबेरी फार्मर धीरज ने कहा कि नौसेना छोड़कर घर आने के बाद पुश्तैनी जमीन पर नए तरीके से खेती का विचार मन में आया।

इनोवेटिव फार्मिंग का विचार, सरकार से सब्सिडी
नौसेना के पूर्व जवान धीरज कुमार ने बताया कि इनोवेटिव फार्मिंग के लिए उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती चुनी। उन्होंने कहा कि उनके विभाग के अधिकारियों को भी स्ट्रॉबेरी की खेती में सफलता का श्रेय जाता है। धीरज बताते हैं कि विभाग से प्रोत्साहन के अलावा सरकार से सब्सिडी भी मिली।

ड्रिप इरीगेशन में सरकारी मदद, अच्छी पैदावार
जम्मू-कश्मीर के मौसम और स्ट्रॉबेरी की खेती के बारे में धीरज बताते हैं कि टपक सिंचाई यानी ड्रिप इरीगेशन में सरकार से काफी मदद मिली। उन्होंने स्थानीय भौगोलिक हालात के बारे में बताया कि नॉर्दन जोन में पश्चिमी डिस्टर्बेंस होती है। बिना मौसम के बरसात से फसल खराब होती थी, लेकिन इस साल उपज बढ़िया हुई है।

तकनीक की मदद से खेती, इनकम बढ़ा
धीरज बताते हैं कि कठुआ के जिस हिस्से में उनका खेत है, यहां बिना मौसम के बरसात होती रहत है। मौसम की मार पड़ने पर कई बार फल खराब हो जाता था, लेकिन इस साल उपज अच्छी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार की मदद और तकनीक अपनाने के बाद खेती करने पर लाभ हो रहा है। इनकम भी बढ़ी है।

धीरज की स्ट्रॉबेरी फार्मिंग से दूसरों को भी रोजगार
नौसेना से रिटायरमेंट के बाद धीरज कुमार कठुआ के हरिपुर में स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। उनकी सफलता के संबंध में गांव के सरपंच रवि कुमार बताते हैं कि स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू होने के बाद 15-20 लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार हो रहा है।

स्ट्रॉबेरी की खेती से मिल रही ख्याति
बता दें कि ऐसे कई युवा हैं जिन्होंने तकनीक की मदद से खेती-किसानी को करियर बनाने का फैसला लेकर दूसरों को प्रेरित करने का काम किया है। ऐसे ही एक किरदार का नाम है एकलव्य। बिहार के बेगूसराय में स्ट्रॉबेरी फार्मिंग कर रहे युवा एकलव्य ने 10वीं की परीक्षा पास करने के बाद यूट्यूब वीडियो की मदद से स्ट्रॉबेरी फार्मिंग सीखी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के झांसी में रहने वालीं गुरलीन चावला ने कानून की डिग्री हासिल करने के बाद स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। बुंदेलखंड में स्ट्रॉबेरी उपजाने के लिए पीएम मोदी ने भी गुरलीन की सराहना की थी।

मार्केट में धीरज स्ट्रॉबेरी की डिमांड
नौसेना में गौरवपूर्ण करियर के बाद एग्रीप्रेन्योर बने धीरज कुमार कठुआ जिले के हरिपुर में रहते हैं। एग्रीप्रेन्योर यानी खेती में उद्यमी बनना। पाकिस्तान से सटी लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के पास हरिपुर में स्ट्रॉबेरी फार्मिंग कर रहे धीरज के हॉर्टिकल्चर को करियर बनाने का फैसला युवाओं को इंस्पायर कर रहा है। धीरज युवाओं के रोल मॉडल के रूप में उभरे हैं। उनके खेत की फसल पैकेजिंग के बाद 'धीरज स्ट्रॉबेरी' के लेबल के साथ मार्केट में बिकती है। स्ट्रॉबेरी एग्रीप्रेन्योर धीरज की अच्छी कमाई के अलावा युवाओं को मिल रहे रोजगार के अवसर प्रेरणा देने वाले हैं।












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