देश के विकास का ऐसा पहलू, जो न सुना और देखा होगा कभी

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अनिल कुमार. हम आपको देश के विकास का एक ऐसा पहलू बताने जा रहे हैं जो न कभी आपने सोचा होगा, न सुना और न देखा होगा। देश की विकास दर एक ऐसे रास्ते पर खड़ी हैं जहां पर होने का आपको शायद ही अंदाजा हो। दऱअसल देश के विकास ने भले ही तेजी न पकड़ी हो, आम आदमी को महंगाई की मार से परेशान किया हो, लेकिन फिर भी देश के विकास दर कुछ ऐसे मुकाम पर है जिसने एक अजीबो-गरीब इतिहास बना दिया है। अब आप बस पढ़ते जाइए....

देश के केंद्रीय सांख्यिकी विभाग ने जो आंकड़े जारी किए हैं उसके मुताबिक औद्योगिक विकास दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जबकि पिछले साल इसमें काफी गिरावट दर्ज की गई थी। दरअसल, औद्योगिक विकास से मतलब जिस आईटी कम्पनी, निर्माण से जुड़ी कम्पनी या फिर किसी और फैक्ट्री में आप काम करते हैं वह कम्पनी विकास कर रही है। जिससे आपको भी फायदा होगा। यानि गत वर्ष औद्योगिक विकास दर में गिरावट से आपको या आपमें से कई को कॉस्ट कटिंग यानी छटनी का दंश झेलना पड़ा हो या आपको मिलने वाला इंसेटिव काट लिया गया हो।

लेकिन अच्छी खबर तो यह है कि इस बार औद्योगिक विकास में नकारात्मक या कहें नेगेटिव रुख नहीं है। जिससे आने वाले समय में आपको ही फायदा हो सकता है। ना...ना अभी नहीं...जिस अजीबो गरीब ऐतिहासिक बात का जिक्र हमने ऊपर किया है वह यह नहीं है...। आपको वही अजीबो गरीब बात अंत में पता चलेगी। हां यकीन मानिए आपको शायद हसी भी आएगी या आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे। तो बस पढ़ते जाइए।

देश हमेशा से कृषि प्रधान देश माना गया है। देश के अभी भी पचास फीसदी से ज्यादा परिवार कृषि से ही अपना गुजर-बसर करते हैं। एक आंकड़े के मुताबिक देश के किसान भले ही दरिद्रता और सरकारी लाभ नहीं मिल पाने की वजह से लाचार हो गए हैं आत्महत्या भी कर रहे हैं। यह कड़वी सच्चाई भी है।

लेकिन इस बार कृषि क्षेत्र के विकास दर में बढ़ोतरी नहीं तो स्थिर दिखाई गई है। आंकड़ों का जिक्र थोड़ा अंतिम पंक्तियों में आपको मिल जाएगा। न..ना वो अजीबो-गरीब बात और देश के विकास का ऐतिहासिक पहलू यह भी नहीं है...बस तीसरे पैराग्राफ और अंतिम पंक्तियों में आप उस अजीबो गरीब बात से रूबरू होंगे। निश्चित ही आप सोचेंगे कि यह क्या हो रहा है देश की विकास दर के साथ।

शायद आपको याद हो..कि वर्ष 2008 चल रहा था और अपने देश की कुल विकास दर भी करीब 8 फीसदी के पास पहंच रही थी। इतनी तेजी से विकास होने के बाद अचानक 2009 से जो लगातार घटकर अब 4.7 फीसदी पर आ गई है।

जितनी तेजी से आई विकास में गिरावट होने से गिरावट का एक इतिहास बना। उसी तरह देश की कुल आर्थिक वृद्धि दर, औद्योगिक विकास दर और कृषि विकास इतिहास गढ़ा है। वो यह कि यह देश दोनो क्षेत्र यानी कृषि और औद्योगिक विकास दर....देश की कुल आर्थिक विकास दर के बराबर दर्ज की जा रही है। ऐसा संभवतः भारतीय इतिहास में पहली बार हुआ है कि आर्थिक विकास दर, कृषि विकास दर और औद्योगिक विकास दर एक समान है।

आर्थिक विकास दर = कृषि विकास दर = औद्योगिक विकास दर

(4.7 फीसदी =4.7 फीसदी=4.7 फीसदी)

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