प्याज ने रुलाया शरद पवार को, बुलाई बैठक

खुदरा बाजार में प्याज की कीमतें 30 से 40 रु. पहुंच गई है। प्याज की बढ़ती कीमतों के लिए कुछ लोग डीजल के बढ़ी कीमतों को वजह बता रहे है तो कुछ लोग प्याज के आयात में आई को वजह मान रहे हैं। दरअसल दिल्ली में महाराष्ट्र, राजस्थान और नासिक से प्याज आता है, लेकिन कम आयात की वजह से मांग बढती जा रही है और कीमतें आसमान छू रही है। घने कोहरे की वजह से भी प्याज की फ सल को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। जिसके कारण भी प्याज की कीमतें लोगों को खून के आंसू रुला रही है।
आसम ये है कि मार्केट में प्याज के साथ- साथ अन्य सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी शुरु हो गई है। मंहगाई की वजह से अपने बिगड़े हुए बजट को संभालने के लिए लोगों ने खाने में प्याज के इस्तेमाल को कम कर दिया है। होटलों ने तो अपने यहां सलाद से प्याज को नदारत ही कर दिया है। कहीं कहीं तो प्याज वाले सलाद के लिए लोग एक्ट्रा चार्ज तक वसूल कर रहे है। होटलों के डाइनिंग टेबल पर हमेशा दिकने वाला सिरका प्याज को अचानक ही कहीं गायब हो गया है। लोगों ने तो प्याज की तरफ देखना ही छोड़ दिया है लेकिन जो इसके शौकिन या आदि है उनके लिए प रेशानी अभी खत्म होती नजर नहीं आ रही।
प्याज की आसमान छूती कीमतों ने शीला सरकार की नींद तो उड़ा ही रखी है और अब कृषि मंत्री शरद पवार की नींद भी टूट गई है। शीला दीक्षित ने कृषि मंत्री से मांग की है कि प्याज के निर्यात पर रोक लगाई जाए ताकि मांग को कम कर कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। कृषि मंत्री ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए आज बैठक बुलाई है। जिसमें प्याज की बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए विचार किया जाएगा। इससे पहले प्याज की बढ़ी कीमतों पर बोलते हुए शरद पवार ने साफ तौर पर कहा था कि कीमतों में बढ़ोतरी लोकल कारणों से हो रही है, इसके लिए उनका विभाग जिम्मेदार नहीं है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र और नासिक में पैदा होने वाले अधिकांश प्याज निर्यात कर दिए जाते है। ऐसे में देश में प्याज की मांग पूरी न हीं हो पा रही है और कीमतें बढ़ रही है।












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