आम की बंपर पैदावार, गिरेंगे दाम, किसान परेशान

Mangoes
नई दिल्ली। दक्षिण व पश्चिम भारत में आम की पैदावार अच्छी होने के कारण इस बार आम आदमी को मन भर आम खाने का मौका रहेगा। लेकिन इस हालात से किसान परेशान हैं। नीचे भावों पर सफेदा आम की भरमार के चलते दशहरी की तलबगार कम हो गए हैं। स्थिति यह है कि दक्षिण भारत से आम की बढ़ती आवक से कमजोर उत्पादन के बावजूद दशहरी उत्पादकों को लागत निकालना मुश्किल हो रहा है।

उत्तर प्रदेश के उत्पादक क्षेत्रों में आंधी व मानसून पूर्व की बारिश के चलते उत्पादकों में घबराहट पूर्ण बिकवाली बढ़ गयी है। अगले महीने चौसा के बाजार में आने की की संभावना है। ऐसे में आम के खुदरा भाव और नीचे आ सकते हैं।

मैंगो मर्चेन्टस एसोसिएशन के अध्यक्ष हरबंश लाल दुआ ने बताया कि दक्षिण व पश्चिमी भारत में आम की पैदावार 25 फीसदी तक अधिक हुई है। इसके चलते उपभोक्ता मंडियों में आम की भरमार है। दिल्ली की मंडियों में दक्षिण व पश्चिमी क्षेत्र से आम की रोजाना आवक 800 टन हो रही है।

बेहतर पैदावार के कारण उपभोक्ताओं को पिछले साल के भावों 25 से 30 किलो की दर पर आम चखने का मौका मिल रहा है। हालांकि उत्तर प्रदेश में दशहरी की पैदावार कम हुई है। लेकिन उपभोक्ता मंडियों में सफेदा, तोतापरी और सूर्खा की उपलब्धता अधिक होने से दशहरी के भाव भी दबे हुए हैं।

पिछले दिनों में लखनऊ सीतापुर और हरदोई आदि उत्पादक क्षेत्रों में जबरदस्त आंधी के कारण दशहरी की आवक बढ़ी है। लेकिन सफेदा के आगे दशहरी आम की खपत कम हो रही है।

उत्पादक क्षेत्रों में दशहरी का दाम 15 से 20 रुपये किलो चल रहा है जबकि दिल्ली सहित अन्य बड़ी उपभोक्ता मंडियों में दशहरी का दाम 30 से 35 रुपये किलो है। हालांकि इन भावों पर किसानों को फायदा नहीं है। इसके बावजूद नीचे भावों पर सफेदा की भरमार से दशहरी उत्पादकों को भी नीचे भावों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

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