बिहार में सूखे के हालात
पटना। 'मानसून का जुआ' कही जाने वाली भारतीय कृषि की हालत वैसे तो इस साल पूरे देश में बेहद खराब है। लेकिन बिहार से प्राप्त जानकारी के मुताबिक राज्य में मानसून के देरी से आने के कारण बिहार के अधिकांश जिले सूखे की चपेट में आ चुके हैं। पानी की कमी के चसते एक तो समय से फसल की रोंपाई का काम शुरू नहीं हो सका दूसरा मानसून के पल-पल बदलते मिजाज ने किसानों की अन्य उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया। सूखे खेत देख कर किसान हताश और परेशान हैं।
मौसम विभाग के मुताबिक कोसी प्रमंडल के जिलों के अलावा राज्य के अन्य सभी जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। अरवल जिले में अब तक 84.4 मिलीमीटर बारिश हुई है जो सामान्य से 73 प्रतिशत कम है। इसी तरह अब तक भभुआ में सामान्य से 52 प्रतिशत, नालंदा में 44 प्रतिशत, पटना में 36 प्रतिशत, भागलपुर में 47 प्रतिशत बारिश कम हुई है। राज्य में अब तक सबसे ज्यादा बारिश किशनगंज में हुई है, जो सामान्य से 53 प्रतिशत अधिक है।
बिहार प्रशासन के आला अधिकारी भी मानते हैं कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष स्थिति ज्यादा भयावह है। अधिकारियों के अनुसार पांच जिलों को छोड़ दिया जाए तो कहीं भी 40 प्रतिशत से ज्यादा बारिश नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि अब तक 50 प्रतिशत से कम धान की रोपाई की सूचना आई है। अगर अगस्त के प्रथम सप्ताह तक भारी बारिश नहीं हुई तब स्थिति और गंभीर हो जाएगी। उस पर बुरी खबर ये है कि सावन महीने के आगमन के बाद भी भारी बारिश के लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं।












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