बिहार के किसानों को मिलेगी नई रफ्तार, जानिए कैसे?
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के बाद सरकार किसी की भी बने, लेकिन किसानों के कार्यों और उनकी आय को गति पक्का मिलेगी। इसकी शुरुआत होगी कृषि तकनीकी अनुप्रयोग संस्थान से। इसे चुनावी स्टंट कहने से पहले जरूरी है कि आप इस संस्थान के बारे में जानें, क्योंकि ऐसे संस्थान की जरूरत देश के हर प्रदेश को है।

केन्द्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने पटना बुधवार को इस संस्थान का उद्घाटन किया। और हां, इससे सिर्फ बिहार ही नहीं झारखंड के किसानों को भी लाभ मिलने वाला है।
बिहार के कृषि तकनीकी अनुप्रयोग संस्थान से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
- यह बिहार और झारखंड के सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों का संचालन करेगा।
- कृषि जगत में हो रहे नये शोध निष्कर्षों को किसानों के खेतों तक ले जाने का काम करेगा।
- यह केन्द्र किसानों को एक छत के नीचे कृषि सम्बन्धी सम्बन्धी समस्याओं का समाधान उपलब्ध करायेगा।
- यह देश का 9नवां कृषि तकनीकी अनुप्रयोग संस्थान है, जो पटना में स्थापित किया गया है।
- इससे जुड़े कृषि विज्ञान केन्द्रों की संख्या 6 से बढ़ाकर 10 कर दी गई है।
- इन केन्द्रों में कुल वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों की संख्या 16 से बढ़ाकर 22 कर दी गई है।
- बिहार में कृषि तकनीकी अनुप्रयोगों से सम्बन्धित जानकारी किसान भाइयों को प्राप्त होगी।
- बिहार में कुल 38 कृषि विज्ञान केन्द्र हैं। ये सभी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
- जो जिले अपेक्षाकृत बड़े हैं उनमें दो कृषि विज्ञान केन्द्रों की स्थापना की जा रही है।
- ये जिले हैं पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, गया और मधुबनी।
- यहां मिट्टी जांच प्रयोगशाला, मिनी बीज प्रसंस्करयण इकाई स्थापित है।
- समेकित कृषि प्रणाली की प्रदर्शन इकाई स्थापित है।
- मौसम के कृषि पर पड़ने वाले दुष्परिणामों से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।
कृषि संस्थानों का इतिहास
भारतीय कृषि अनुसंधान की शुरूआत 1905 में पूसा, समस्तीपुर में हुई। समय के साथ-साथ, तब से आज तक कृषि में अमूल-चूल परिवर्तन हुआ है। कृषि अनुसंधान के तौर-तरीकों में भी काफी सुधार हुआ है। कृषि वैज्ञानिकों के प्रयासों के चलते ही देश खाद्यान्न सुरक्षा में आत्मनिर्भर हो पाया है। नये अनुसंधान की है वो तो अनवरत एवं आबाध रूप से जारी हैं।
वर्तमान में पूरे देश में 642 कृषि विज्ञान केन्द्रों की स्थापना की जा चुकी है। इनके संचालन के लिये एक उपमहानिदेशक (प्रसार) मुख्यालय में पद स्थापित है। इनको सहायता हेतु मुख्यालय पर सहायक महानिदेशक और वैज्ञानिकों की एक टीम काम करती है। पूरे देश में कृषि विज्ञान केन्द्रों को सुचारू रूप से संचालित करने हेतु अभी तक कुल 08 क्षेत्रीय परियोजना निदेशालय हैं, जिसकी संख्या अब 11 की गई है, इसमें एक पटना में है।












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