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Ashwagandha Farming : तनाव दूर करने का शानदार विकल्प, किसानों को चिंता से मिलेगी मुक्ति

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नई दिल्ली, 15 मई : अश्वगंधा की खेती (Ashwagandha Farming) किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है। एक ऐसे दौर में जब किसानों की फसलों को उचित दाम नहीं मिल रहा, अश्वगंधा की खेती से किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। आम तौर पर आयुर्वेद में अश्वगंधा का प्रयोग तनाव और चिंता दूर करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा भी अश्वगंधा के इस्तेमाल से कई दवाएं बनाई जाती हैं। अश्वगंधा की खेती का तरीका (Ashwagandha farming method) जानने के बाद किसान भाई जानवरों से फसल की सुरक्षा को लेकर भी निश्चिंत रह सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि अश्वगंधा की फसल जानवर नहीं खाते। जानिए अश्वगंधा की खेती से मुनाफा कमाने के तरीके

अश्वगंधा की खेती से मुनाफे की गारंटी !

अश्वगंधा की खेती से मुनाफे की गारंटी !

अश्वगंधा की खेती करने का सबसे बड़ा लाभ ये है कि धान, गेहूं और मक्का की तुलना में किसानों को अश्वगंधा की फसल से लगभग 50 फीसद अधिक मुनाफा मिलता है। अश्वगंधा रोम युक्त पौधा है जिसे कैशकॉर्प भी कहा जाता है। कृषि वैज्ञानिक अश्वगंधा की बुवाई के लिए अगस्त के महीने के ज्यादा सही मानते हैं।

कैशकॉर्प के रूप में भी पॉपुलर है अश्वगंधा

कैशकॉर्प के रूप में भी पॉपुलर है अश्वगंधा

उत्तर प्रदेश और बिहार में सितंबर-अक्टूबर में बारिश कम होती है। आम तौर पर इन राज्यों के किसान अश्वगंधा की बुवाई इन्हीं दिनों में करते हैं। बिहार के बेगूसराय और भागलपुर में अश्वगंधा की खेती एक्सपेरिमेंट के तौर पर किया गया। कृषि वैज्ञानिक अश्वगंधा को बिहार के अन्य भागों में भी अश्वगंधा की खेती को प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रहे हैं। जाड़े के दिनों में अश्वगंधा की जड़ों का अच्छा विकास होता है।

एक साल में 7000 टन की डिमांड

एक साल में 7000 टन की डिमांड

अश्वगंधा दो तरीकों से लगाया जा सकता है। पहली विधि है- कतार विधि, यानी एक लाइन में पौधों की रोपाई। वैज्ञानिकों के मुताबिक अश्वगंधा को कतार में लगाने के दौरान दो पौधों के बीच 5 सेंटीमीटर की दूरी रखनी चाहिए। इसके अलावा दो कतारों के बीच की दूरी 20 सेंटीमीटर से कम नहीं रखनी चाहिए।

अश्वगंधा की भारी डिमांड
मध्यम लंबाई वाला बहुवर्षीय पौधा अश्वगंधा हर तरीके से फायदेमंद है। बीज, फल और छाल का कई रोगों के उपचार में इस्तेमाल किया जाता है। भारत में अश्वगंधा की जड़ों का उत्पादन 1600 टन प्रति वर्ष होता है, जबकि प्रतिवर्ष 7000 टन की डिमांड है।

अश्वगंधा की खेती से किसानों को 50 फीसद अधिक मुनाफा

अश्वगंधा की खेती से किसानों को 50 फीसद अधिक मुनाफा

जड़ी बूटियों में अश्वगंधा सर्वाधिक प्रचलित नाम है, ऐसा कहना गलत नहीं होगा। तनाव और चिंता जैसी स्वास्थ्य समस्या दूर करने में अश्वगंधा का इस्तेमाल किया जाता है। एक हेक्टेयर में अश्वगंधा की खेती के लिए 10-12 किलो बीज की जरूरत पड़ती है। बुआई के 7-8 दिनों बाद अंकुर निकल आता है।

बीज, फल और छाल से इलाज, हजारों का मुनाफा

बीज, फल और छाल से इलाज, हजारों का मुनाफा

केंद्रीय औषधि एवं सगंध पौधा संस्थान में अश्वगंधा की खेती के संबंध में शोध और प्रशिक्षण होते हैं। इसकी जड़ें लंबी और अंडाकार होती हैं। अश्वगंधा के फल गोलाकार चिकने और लाल रंग के होते हैं। एक हेक्टेयर में अश्वगंधा की खेती में लगभग 10 हजार तक का खर्च आता है। अश्वगंधा की 5 क्विंटल जड़ों और बीज का मार्केट प्राइस 78,500 से अधिक होता है, ऐसे में किसानों को लगभग 68 हजार का लाभ मिलता है। उन्नत बीज के प्रयोग से लाभ और अधिक हो सकता है।

अश्वगंधा के लिए कौन सी जमीन बेहतर

अश्वगंधा के लिए कौन सी जमीन बेहतर

अश्वगंधा की खेती के लिए ऐसी जमीन बेहतर मानी जाती है, जहां जल निकास की सुविधा है। बलोई दोमट या हल्की लाल मिट्टी जिसमें पीएच वैल्यू 7.5 से आठ के बीच हो, अश्वगंधा के लिए आदर्श मानी जाती है। अश्वगंधा के पौधे 20-35 डिग्री तापमान के बीच अच्छी तरह विकसित होते हैं। जिन इलाकों में हर साल 500-750 मिलीमीटर बारिश होती है, वहां अश्वगंधा की खेती आसानी से की जा सकती है। अश्वगंधा की खेती लवणीय पानी में भी होती है। अश्वगंधा के पौधों की बढ़वार के समय शुष्क मौसम और प्रचूर नमी जरूरी होती है।

अश्वगंधा जंगली जानवरों से सुरक्षित

अश्वगंधा जंगली जानवरों से सुरक्षित

लगभग 30 हजार की लागत में एक एकड़ में अश्वगंधा की रोपाई की जा सकती है। इसकी खेती कर रहे किसानों के मुताबिक पहली फसल चार-पांच महीनों में तैयार हो जाती है। किसानों को दोगुना मुनाफा मिल सकता है। किसानों और वैज्ञानिकों के अनुभव के मुताबिक अश्वगंधा की फसल को जंगली जानवर नहीं खाते। ऐसे में फसल की सुरक्षा को लेकर किसानों की चिंता दूर हो सकती है।

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English summary
know about Ashwagandha farming method. Scientific name of Ashwagandha is withania somnifera. Farmers may earn more with Ashwagandha shrub cultivation.
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