Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Bihar Exit Poll: मोदी-नीतीश ने ऐसा क्या किया कि एग्जिट पोल में NDA को मिली बंपर जीत! कौन से 8 फैक्टर रहे हावी?

Bihar Exit poll 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के एग्जिट पोल नतीजों ने एक बार फिर सियासी हवा का रुख साफ कर दिया है। इस बार ज्यादातर सर्वे बता रहे हैं कि एनडीए सत्ता में वापसी की ओर बढ़ रही है। 10 एजेंसियों के पोल ऑफ पोल्स के मुताबिक, एनडीए को 150 से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं, जबकि महागठबंधन 80 सीटों के आसपास सिमट सकता है। वहीं अन्य दलों को 5 सीटें मिलने का अनुमान है।

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी, जो पहली बार मैदान में उतरी है, को लेकर लोगों में चर्चा जरूर रही, लेकिन वोटों में इसका कोई खास असर नजर नहीं आया। अब बड़ा सवाल यह है -आखिर ऐसा क्या हुआ कि बिहार में एनडीए को इतनी बड़ी बढ़त मिलती दिख रही है? आइए जानते हैं वो 8 फैक्टर जिन्होंने इस चुनाव की दिशा तय की।

Bihar Exit Poll

मोदी-नीतीश पर भरोसा, तेजस्वी को जंगलराज ले डूबा, 8 फैक्टर जो रहे हावी

🔹 1. जातीय समीकरण और पसंदीदा पार्टी का मेल

बिहार में वोटिंग का सबसे बड़ा फैक्टर अब भी जाति और पसंदीदा पार्टी का कॉम्बिनेशन है। बिहार में करीब 57% वोटर जातीय आधार पर वोट करते हैं। इस बार भी कई सीटों पर ऐसा ही समीकरण बना जहां उम्मीदवार की जाति और पार्टी दोनों ही वोटरों की पसंद से मेल खा रही थीं। इसका सीधा फायदा एनडीए को मिला, खासकर बीजेपी और जेडीयू के पारंपरिक वोटबैंक को।

🔹 2. चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा की वापसी से बढ़ा NDA का गणित

2020 में एलजेपी और आरएलएम के अलग रास्ते जाने से एनडीए को कई सीटों का नुकसान हुआ था। लेकिन इस बार चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा दोनों की वापसी ने एनडीए का समीकरण मजबूत कर दिया। इन दोनों नेताओं की पार्टी ने पिछली बार करीब 42 सीटों पर एनडीए के वोट काटे थे, जो अब इस बार वापस गठबंधन के पक्ष में गए।

Bihar Exit Poll

🔹 3. महिला वोट बैंक नीतीश कुमार के साथ

बिहार की राजनीति में महिला मतदाता हमेशा से नीतीश कुमार का भरोसेमंद आधार रहे हैं। इस बार भी उनकी योजनाओं जीविका दीदी नेटवर्क, 10 हजार रुपए की सहायता राशि, और फ्री बिजली योजना ने ग्रामीण और महिला मतदाताओं को उनकी तरफ झुकाया।

आंकड़ों के मुताबिक, सरकार ने 1.21 करोड़ महिलाओं को डायरेक्ट 10 हजार कैश ट्रांसफर दिया है, जो कुल महिला वोटरों का करीब 35% हिस्सा है। यही वोट बैंक एनडीए को निर्णायक बढ़त दिला सकता है।

🔹 4. नीतीश के खिलाफ नहीं दिखी एंटी-इनकम्बेंसी

20 साल सत्ता में रहने के बावजूद नीतीश कुमार के खिलाफ नाराजगी नहीं दिखी। बल्कि लोगों में एक भाव था कि उन्होंने बिहार को बुनियादी सुविधाओं में आगे बढ़ाया है। चुनाव से पहले की गई 17-18 नई घोषणाओं ने माहौल बदल दिया। जहां तेजस्वी यादव इस बार 'परिवर्तन' का संदेश दे रहे थे, वहीं नीतीश कुमार ने 'गारंटी और भरोसे' का कार्ड खेलकर मैदान पलट दिया।

Bihar Exit Poll

🔹 5. तेजस्वी यादव के लिए 'जंगलराज' की पुरानी छवि अब भी नुकसानदेह

तेजस्वी यादव की सबसे बड़ी चुनौती उनके पिता लालू प्रसाद यादव के दौर की 'जंगलराज' वाली इमेज रही। एनडीए ने लगातार इसे मुद्दा बनाकर जनता को याद दिलाया कि अगर महागठबंधन आया तो "वो दिन" लौट सकते हैं। तेजस्वी यादव अपनी नई पीढ़ी वाली राजनीति पर जोर देते दिखे, लेकिन पुराने नैरेटिव की छाया इस चुनाव में भी उनके साथ रही।

🔹 6. मोदी फैक्टर अब भी मजबूत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा बिहार में अब भी वोट जुटाने वाला ब्रांड बना हुआ है। उनकी लोकप्रियता किसी जाति या वर्ग तक सीमित नहीं है। चुनाव प्रचार में उनकी मौजूदगी और 'डबल इंजन सरकार' का नारा सीधे ग्रामीण वोटरों के बीच गूंजा। इसके मुकाबले प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी तीसरे विकल्प के तौर पर प्रचार में रही, लेकिन ग्राउंड पर असर छोड़ने में नाकाम रही।

🔹 7. महागठबंधन की कमजोर कड़ियां - कांग्रेस और VIP

महागठबंधन की सबसे कमजोर कड़ी रही कांग्रेस और विकासशील इंसान पार्टी (VIP)। कांग्रेस का टिकट वितरण विवादों में रहा और कई सीटों पर फ्रेंडली फाइट की स्थिति बनी रही। महागठबंधन ने न तो कोई साझा मुख्यमंत्री चेहरा तय किया और न ही एकजुट रणनीति। नतीजतन, RJD कांग्रेस और वामदलों के बीच तालमेल की कमी ने विपक्ष को कमजोर किया।

🔹 8. सीमांचल में मुस्लिम वोटों का बंटवारा

सीमांचल क्षेत्र में मुस्लिम वोटों का विभाजन महागठबंधन के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी इस बार भले कम सीटों पर लड़े हों, लेकिन उनकी मौजूदगी ने RJD के कोर वोट बैंक में सेंध लगाई। कांग्रेस का संगठन कमजोर रहा और वामदलों का असर सिमटा हुआ, जिसका फायदा बीजेपी को अप्रत्यक्ष रूप से मिला।

बिहार एग्जिट पोल 2025: जनता ने स्थिरता और भरोसे पर वोट किया

बिहार के एग्जिट पोल के नतीजे इस बात का संकेत हैं कि जनता ने स्थिरता और भरोसे पर वोट किया है, न कि वादों और प्रयोगों पर। एनडीए के पक्ष में जातीय गणित, महिला वोट बैंक, मोदी फैक्टर और नीतीश की योजनाएं निर्णायक साबित हुई हैं। वहीं तेजस्वी यादव को "जंगलराज" की पुरानी छवि और कमजोर सहयोगियों ने पीछे धकेल दिया। अब 14 नवंबर को आने वाले नतीजे तय करेंगे कि क्या एग्जिट पोल सही निकलेगा या बिहार एक बार फिर सबको चौंका देगा।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+