कौन हैं कर्नल अजय कोठियाल, जिन्हें AAP ने बनाया उत्तराखंड का सीएम उम्मीदवार, जानिए
देहरादून, 17 अगस्त: उत्तराखंड में 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने के वादे के साथ 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में उतर चुकी आम आदमी पार्टी ने मंगलवार को एक और तगड़ा दांव खेला है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने भारतीय सेना के रिटायर्ड अधिकारी कर्नल अजय कोठियाल को राज्य में अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया है। यह वही कोठियाल हैं, जिन्हें पार्टी ने गंगोत्री सीट से उपचुनाव में उतराने का मन बना रखा था, जहां पर पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत के चुनाव लड़ने की संभावना थी। राजनीति में रिटायर्ड कर्नल कोठियाल भाजपा के कमल पर किस तरह से झाड़ू लगा पाते हैं, यह तो अभी नहीं कहा जा सकता है, लेकिन आर्मी ऑफसर के रूप में उनकी साख काफी बुलंद रही है।

आम आदमी पार्टी में कब शामिल हुए अजय कोठियाल ?
रिटायर्ड कर्नल अजय कोठियाल ने इसी साल 20 अप्रैल को आम आदमी पार्टी की झाड़ू थामी थी और चार महीने से भी कम वक्त में उन्हें केजरीवाल की पार्टी ने मुख्यमंत्री पद के लिए प्रोजेक्ट कर देवभूमि में अपनी सियासी किस्मत सेट करने की कोशिश की है। उस समय पार्टी ने फैसला किया था कि उन्हें गंगोत्री विधानसभा सीट से उपचुनाव का टिकट थमाएगी, जहां से तत्कालीन मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के चुनाव लड़ने की अटकलें थीं। तीरथ रावत ने पहले ही इस्तीफा दे दिया और उपचुनाव होने की फिलहाल कोई संभावना नजर नहीं आ रही है।
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उत्तराखंड में कहां के रहने वाले हैं कर्नल अजय कोठियाल
गुरदासपुर में जन्मे कर्नल कोठियाल उत्तराखंड के टिहरी जिले के ग्राम चौंफा के रहने वाले हैं। 26 फरवरी, 1968 को जन्मे कोठियाल की शुरुआती शिक्षा सेंट जोसेफ स्कूल देहरादून से और कॉलेज की पढ़ाई डीएवी पीजी कॉलेज से हुई है। इनके पिता भी भारतीय सेना में थे, इसलिए उनका ट्रांसफर देश में जहां-जहां होता रहा, वे भी परिवार वालों के साथ जाते रहे। कोठियाल ने शादी नहीं की है।

आर्मी ऑफिसर कर्नल अजय कोठियाल की पहचान
कर्नल अजय कोठियाल 1992 में भारतीय सेना में बतौर अधिकारी नियुक्त हुए थे। सेना में उनका करियर 4 गढ़वाल रेजिमेंट शुरू हुआ और उसके बाद इन्होंने अपनी वीरता और शौर्य से कई बार देश के गौरव को बढ़ाने का काम किया है। उनका नाम उस 'ऑपरेशन कोंगवतन' से जुड़ा है, जिसमें इन्होंने 7 आतंकियों को ढेर कर दिया था। इस वीरता के लिए इन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा इन्होंने उस 'ऑपरेशन पराक्रम' में भी बड़ी भूमिका निभाई, जिसमें 4 गढ़वाल राइफल्स ने 21 दहशतगर्दों को ढेर कर दिया था और उनमें से 17 आतंकी को मारने में इन्होंने सीधा रोल निभाया था। रिटायर्मेंट से पहले वो उत्तरकाशी स्थित नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनीयरिंग के प्रिंसिपल भी रह चुके हैं।

केदारनाथ के पुनर्निमाण में भूमिका
उत्तराखंड में जून 2013 में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा के बाद केदारनाथ के पुनर्निमाण में भी ये बहुत बड़ी भूमिका निभा चुके हैं। बाबा केदारनाथ धाम का जौ सौंदर्य आज निखरकर आता है, उसका श्रेय काफी हद तक कर्नल कोठियाल और उनकी जुझारू टीम को जाता है।

कई और उपलब्धियां हैं इनके नाम
अजय कोठियाल का 2013 में ही एक बार तब और नाम हुआ था, जब एक इंस्ट्रक्टर की मदद से उन्होंने 30 युवाओं को ट्रेनिंग दी थी, जिनमें से 28 गढ़वाल राइफल्स के लिए चुने गए थे। उनकी इस कामयाबी की खबर इस तरह से फैली की कई उम्मीदवारों ने इनसे संपर्क किया, जिसके बाद इन्होंने 2015 में नॉन-प्रॉफिट ट्रस्ट यूथ फाउंडेशन स्थापित किया, जिसके 6 कैंप उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों में चलते हैं। यही नहीं उन्होंने दो बार एवरेस्ट फतह किया और एवरेस्ट अभियान की अगुवाई भी की।












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