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V K Sasikala:कैसे मामूली वीडियो शॉप से निकलकर तमिलनाडु की सबसे प्रभावशाली महिला बनीं 'चिनम्मा'

Tamil Nadu assembly election 2021:आय से अधिक संपत्ति के मामले में चार साल की सजा पूरी करने के बाद अन्ना द्रमुक की निष्कासित नेता वीके शशिकला उर्फ शशिकला नटराजन बेंगलुरु के सेंट्रल जेल से औपचारिक तौर पर रिहा हो गई हैं। इस वक्त वह बेंगलुरु के विक्टोरिया अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनका कोविड-19 संक्रमण के लिए इलाज चल रहा है। हालांकि, उन्हें अस्पताल से बाहर आने में अभी कुछ और दिन लग सकते हैं और इस दौरान उनके परिवार वाले इलाज के लिए उन्हें किसी निजी अस्पताल में भी भर्ती करवा सकते हैं। वह अभी अस्पताल में ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम पर हैं, लेकिन तय है कि चुनावी साल में उनकी रिहाई का असर आने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है। क्योंकि, जबतक तमिलनाडु की सत्ता में एआईएडीएमके(AIADMK) की नेता जयललिता (Jayalalithaa) मुख्यमंत्री के तौर पर काबिज रहीं, उनकी सरकार और उनकी पार्टी पर उनकी दोस्त और सहयोगी वीके शशिकला का ही जलवा रहा।

मुख्यमंत्री बनते-बनते चूक गई थीं शशिकला

मुख्यमंत्री बनते-बनते चूक गई थीं शशिकला

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की बेहद करीबी रहीं वीके शशिकला तमिलनाडु की ऐसी दबदबे वाली महिला नेता हैं, जो 2016 में उनकी मौत के बाद उनकी जगह मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गईं। जयललिता के निधन के बाद एआईएडीएमके जनरल काउंसिल ने उन्हें सर्वसम्मति से पार्टी का महासचिव चुन लिया था, जो तब दल का सर्वोच्च पद होता था। उनके जेल जाने के बाद अब पार्टी में यह पद ही खत्म कर दिया गया है। शशिकला पर आरोप है कि उन्होंने जयललिता से अपनी नजदीकियों का फायदा उठाया और अपने परिवार के लिए अकूत संपत्ति जमा की। वो पहले कलर टीवी घोटाले में भी 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रह चुकी हैं। शशिकला और सह-आरोपियों को सितंबर 2014 में स्पेशल कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति का दोषी ठहराते हुए चार साल जेल की सजा सुनाई थी। बाद में 14 फरवरी, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें भ्रष्टाचार का दोषी माना और चार साल कैद की सजा बरकरार रखी। इस केस में वह 15 फरवरी, 2017 से बेंगलुरु (Bengaluru) के बाहरी इलाके में स्थित पाराप्पाना अग्रहारा सेंट्रल जेल (Parappana Agrahara central jail) में कैद थीं। अदालत ने अपने फैसले में उन्हें 10 साल तक चुनाव लड़ने पर भी पाबंदी लगा दी, जिससे अपनी दोस्त जयललिता की जगह मुख्यमंत्री बनने का उनका सपना चकनाचूर हो गया। अदालत के फैसले के बाद पार्टी ने उन्हें अंतरिम महासचिव पद से बेदखल करके उस पद को भी सर्वसम्मति से खत्म कर दिया।

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    80 के दशक में एक मामूली वीडियो शॉप चलाती थीं शशिकला

    80 के दशक में एक मामूली वीडियो शॉप चलाती थीं शशिकला

    1980 के दशक के शुरुआती वर्षों की बात है। चेन्नई के अलवरपेट इलाके में 'विनोद वीडियो सेंटर' के नाम से एक बहुत ही छोटी सी दुकान थी। यह दुकान शशिकला नटराजन चला थीं, जहां वो रेंट पर वीडियो देती थीं। उनके पति आर नटराजन उस वक्त तमिलनाडु सरकार में जनसंपर्क अधिकारी होते थे। पहली बार 1982 में शशिकला को उनके पति आर नटराजन और एक वरिष्ठ अधिकारी वीएस चंद्रलेखा (VS Chandralekha) ने जयललिता (Jayalalithaa) से मिलवाया था। उस वक्त जयललिता राजनेता नहीं थीं, बल्कि तमिल फिल्मों की सुपरस्टार थीं, जिन्हें एआईएडीएम (AIADMK)के तत्कालीन नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पूर्व एमजी रामचंद्रण (M. G. Ramachandran) राजनीति का पाठ पढ़ा रहे थे।

    1988 से ही जयललिता के साथ रहने लगीं

    1988 से ही जयललिता के साथ रहने लगीं

    उस समय से ही शशिकला का जयललिता के घर में आने-जाने का सिलसिला शुरू हो गया था। 1987 में एमजीआर (MGR) के निधन के बाद जयलिलता सुर्खियों में आ चुकी थीं। खासकर एमजीआर के समर्थकों और उनकी पत्नी ने उनके साथ जो सलूक किया, उससे उन्हें और भी सहानुभूति मिली। एमजीआर (MGR)के बाद जयललिता के अकेलेपन ने शशिकला को उनके इतना करीब ला दिया कि 1988 में वो अपने पति के साथ बोरिया-बिस्तर लेकर उन्हीं के घर पर रहने लगीं। सहानुभूति लहर पर सवार जयललिता 1991 का विधानसभा जबर्दस्त तरीके से जीत गईं और मुख्यमंत्री बनीं। उसके बाद उन्होंने 6 बार चुनाव जीतकर यह पद हासिल किया। इस दौरान शशिकला ज्यादातर समय जयललिता के साथ उनके पोएस गार्डन (Poes Garden) में ही रहीं।

    जयललिता से सिर्फ एक कदम पीछे चलती थीं शशिकला

    जयललिता से सिर्फ एक कदम पीछे चलती थीं शशिकला

    हालांकि, ऐसे कई मौके भी आए जब दोनों में खटपट भी हुई। पहली बार 1990 में जयललिता ने जब शशिकला के पति नटराजन को अपने घर से निकाल भी दिया था। लेकिन फिर भी वह उनके साथ ही रहीं। वह जयललिता से सिर्फ एक कदम पीछे चलती थीं, लेकिन उनका परिवार ही मुख्यमंत्री के लिए सबकुछ बन चुका था। जयललिता पर शशिकला का ऐसा जादू चढ़ा था कि उनके भरोसेमंद को ही तमिलनाडु शासन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती थीं। 2016 में एक आईपीएस अफसर ने एक अखबार को बताया था कि, 'उनका आदमी हर जगह है, जया टीवी से लेकर मंत्रियों के दफ्तरों तक और पुलिस और आईएएस में भी ऊपर से नीचे तक उनके चहेते भरे हुए हैं।' लेकिन, 2011 में जयललिता ने शशिकला और उनके परिवार के 13 लोगों को पार्टी से निकालकर सबको चौंका दिया था। इससे पहले 1996 में जब 66 करोड़ रुपये के आय से अधिक संपत्ति मामले में शशिकला गिरफ्तार हुई थीं, तब भी जयललिता ने उनसे दूरी बना ली थी।

    'अम्मा' के बाद 'चिनम्मा' का था जलवा

    'अम्मा' के बाद 'चिनम्मा' का था जलवा

    एक समय ऐसी चर्चा थी कि पार्टी में शशिकला के बढ़ते दखल से जयललिता काफी परेशान रहने लगी थीं। लेकिन, 2012 में वह मौका भी आया जब उन्होंने यू-टर्न लेकर शशिकला को फिर से अपने साथ ले लिया। शशिकला ने तब सार्वजनिक तौर पर अपने परिवार वालों से दूरी बनाई थी और जयललिता को एक माफीनामा भी दिया था। आखिरकार जब दिसंबर, 2016 में जयललिता की बीमारी के बाद मौत हो गई तो उनकी खाली जगह भरने को लेकर उनकी अहमियत पार्टी में फिर बढ़ गई। जयललिता को धीमा जहर दिए जाने की साजिशों की खबर भी उड़ती रही, लेकिन फिर भी 'अम्मा' के बाद पार्टी 'चिनम्मा' के साथ डटकर खड़ी दिखी। शशिकला उसी पोएस गार्डन में रहती रहीं, जो उनका कभी नहीं था और ना ही जयललिता यह उन्हें देकर गई हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद ही उनसे उनकी दोस्त का यह घर छूटा था।

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