• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

Farmers Tractor rally:पहले से थी साजिश की भनक तो चुप क्यों रहे किसान नेता ?

|

Farmers Tractor rally:'हमारा रूट, रिंग रोड'-'परेड रोड, रिंग रोड'। कई किसान नेता स्वीकार करते हैं कि सिंघु बॉर्डर पर तय रूट से अलग रास्ते से ट्रैक्टर रैली निकालने को लेकर यह नारेबाजी सोमवार रात से ही शुरू हो गई थी। सवाल है कि जब संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेताओं को यह बात मालूम थी कि उनके मंच को कुछ उत्पाती तत्वों ने हथिया लिया है तो उन्होंने उन्हें रोकने की बजाय चुप्पी क्यों साध ली? क्या उन्हें इल्म नहीं था कि अगर पुलिस को इन शरारती तत्वों के मंसूबों के बारे में नहीं बताएंगे तो हालात बेकाबू हो सकते हैं? या फिर उन्हें अपनी नेतागीरी बचाने की चिंता रही? या फिर इस हिंसा को उनका मौन समर्थन प्राप्त था, जिसमें खुद उनके भड़काऊ बयानों ने भी आग में घी का काम किया?

एक रात पहले ही मंच पर हो गया था उत्पातियों का कब्जा

एक रात पहले ही मंच पर हो गया था उत्पातियों का कब्जा

25 जनवरी की रात से ही दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा (SKM)के मंच पर कुछ उत्पाती तत्वों का कब्जा हो गया था, जो खुलेआम ट्रैक्टर रैली के लिए मंजूर किए गए रूट से अलग रूट पर जाने की नारेबाजी कर रहे थे। कई नेताओं ने माना है कि मंच पर ऐसे उत्पाती तत्वों का बोलवाला हो गया था। शाम 6 बजे से लेकर आधी रात तक इन उत्पाती तत्वों ने दिल्ली पुलिस और संयुक्त किसान मोर्चा के बीच बनी सहमति का विरोध किया था और खुद के रास्ते पर चलने की चुनौती दे रहे थे। उनका किसान मोर्चे के नेताओं के खिलाफ ये नारेबाजी और भाषण कई पंजाबी वेब चैनलों निजी सोशल मीडिया एकाउंट से लाइव वेबकास्ट किए जा रह थे। उस समय एक तरह से आंदोलन पर युवा कार्यकर्ताओं का कब्जा हो गया था और भीड़ में से किसान नेताओं पर यहां तक आरोप लगाए जा रहे थे कि वह गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में परेड को लेकर अपनी पहले की बात से पीछे हट रहे हैं। लेकिन, उस उग्र होती भीड़ को समझाने के वक्त में सारे किसान नेता वहां से दूर हट गए थे।

    Farmer Protest: VM Singh ने आंदोलन खत्म करने की बात कही, Rakesh Tikait पर आरोप | वनइंडिया हिंदी
    किसान नेताओं को भड़काऊ नारेबाजी की जानकारी थी

    किसान नेताओं को भड़काऊ नारेबाजी की जानकारी थी

    शुरू में मंच से कुछ अनजान चेहरे किसान नेताओं से मांग कर रहे थे कि वह आकर बताएं कि दिल्ली पुलिस के साथ रूट को लेकर उनकी क्या सहमति बनी है। इसके बाद गैंगस्टर से नेता बने लखबीर सिंह सिधाना उर्फ लखा सिधाना (Lakhbir Singh Sidhana alias Lakha Sidhana) और पंजाबी ऐक्टर दीप सिद्धू (Deep Sidhu) ने मोर्चा संभाल लिया। सिद्धू ने मंच से कहा, 'हमारी लीडरशिप दबाव में है। हमें उनपर और दबाव नहीं देना चाहिए। लेकिन, उनसे कह सकते हैं एक ऐसा फैसला लें जो सबको मंजूर हो। उन्हें मंच पर आना चाहिए। अगर वो नहीं आएंगे तब हम फैसला लेंगे।' लेकिन,कथित किसान नेताओं ने फिर भी कोई ऐक्शन नहीं लिया।

     'भावना में बहकर' फहराए गए झंडे- सिद्धू

    'भावना में बहकर' फहराए गए झंडे- सिद्धू

    वहीं मालवा यूथ फेडरेशन के अध्यक्ष लखा सिधाना( Lakha Sidhana)ने कहा, 'हजारों युवा रिंग रोड से जाना चाहते हैं। किसान मजदूर संघर्ष समिति ने पहले से ही रिंग रोड से जाने का फैसला कर लिया है। वे हम से पहले से प्रदर्शन कर रहे हैं, सो हमारे ट्रैक्टर उनके पीछे रहेंगे। इसलिए यदि कोई रिंग रोड पर जाना चाहता है, वह किसान मजदूर संघर्ष समिति के पीछे चल सकता है.....तब मुद्दा क्या है? अब आपको शांत हो जाना चाहिए। 'सिद्धू तो मंगलवार को उपद्रव के दौरान रेड फोर्ड पर मौजूद थे, लेकिन सिधाना कहां थे, इसकी पुख्ता जानकारी नहीं है। अब आरोप लग रहे हैं कि लालकिले पर धार्मिक झंडा फहराने वालों को सिद्धू और सिधाना जैसे लोगों ही ने उकसाया था। हालांकि, सिद्धू ने सोशल मीडिया के जरिए वीडियो संदेश में इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि 'निशान साहिब' और किसान यूनियन के झंडे 'भावना में बहकर' फहरा दिए गए।

    किसान नेताओं ने उपद्रवियों को रोका क्यों नहीं ?

    किसान नेताओं ने उपद्रवियों को रोका क्यों नहीं ?

    दीप सिद्धू (Deep Sidhu)और उनके भाई मनदीप सिंह (Mandeep Singh) को इसी महीने खालिस्तानी संगठन सिख पर जस्टिस (Sikh for Justice) से जुड़े एक मुकदमे के मामले में एनआईए (NIA) बुला चुकी थी। जबकि, एक जमाने में हिस्ट्रीशीटर रह चुके लखा सिधाना ( Lakha Sidhana)कई गंभीर अपराधों में बरी होने के बाद 2012 के पंजाब विधानसभा चुनाव में पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब से सियासी किस्मत भी आजमा चुके हैं, जिसमें वो असफल रहे थे। जब सिंघु बॉर्डर पर करीब दो महीने से आंदोलन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेताओं को इन दोनों के इतिहास के बारे में जानकारी थी और उन्होंने मंच से जिस तरह के भड़काऊ नारे लगाए, फिर 26 जनवरी के दिन दिल्ली की सड़कों से लेकर लालकिले तक किसानों की ट्रैक्टर रैली के नाम पर जो तांडव हुआ, उससे ये कथित किसान नेता अपना पल्ला कैसे झाड़ सकते हैं? उनके पास उपद्रवी ताकतों को ट्रैक्टर रैली से दूर करने का पूरा वक्त था। दरअसल, इसके पीछे भी वजह है।

    क्या नेतागीरी छिनने से डर गए थे नेताजी?

    क्या नेतागीरी छिनने से डर गए थे नेताजी?

    ऐसे में सवाल उठता है कि क्या किसान नेताओं को अपनी नेतागीरी खोने का डर सता रहा था कि ट्रैक्टर रैली के हिंसक होने की तमाम पूर्व आशंकाओं के बावजूद उन्होंने चुप्पी साधे रखी। एक सिख लेखक डॉक्टर सुखप्रीत सिंह उड़ोके जो उस वक्त मंच पर मौजूद थे, उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा है, 'किसान संगठन के नेताओं ने पहले गणतंत्र दिवस पर संसद पहुंचने का आह्वान किया था। फिर उन्होंने दिल्ली में घुसने के आह्वान में सुधार कर दिया। तब वो रिंग रोड पर जाने की बात पर आ गए। लेकिन, पुलिस के साथ समझौते में वो रिंग रोड से भी पीछे हट गए। युवा भड़के हुए थे।.....' इस समय सोशल मीडिया पर कई ऐसे वायरल वीडियो मौजूद हैं, जिनमें तथाकथित किसान नेता बैरिकेडिंग तोड़ने, दिल्ली घुसने, पुलिस और सरकार को चुनौती देने का भड़काऊ बयान दे चुके हैं।ऐसे में क्या उन्हें लगा कि अब वह अगर अपनी ही आग लगाई बात से वो उत्पातियों को रोकेंगे तो कहीं पूरा आंदोलन ही उनके हाथ से ना निकल जाए?

    इसे भी पढ़ें- Tractor Rally Row: कौन है गैंगस्टर लक्खा सिंह सिधाना,जिस पर लगा लोगों को भड़काने का आरोप?

    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    Farmers Tractor rally:If there was a conspiracy before then why should the farmer leaders remain silent?
    For Daily Alerts
    तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
    Enable
    x
    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X