बदरीनाथ, कर्णप्रयाग और थराली सुरक्षित सीट, दबदबा एक दल का लेकिन बदरी​ विशाल के आशीर्वाद से ही बनती है सरकार

चमोली जिले की तीन सीट बदरीनाथ, कर्णप्रयाग और थराली सीट

देहरादून, 3 फरवरी। चमोली जिले की तीन सीट बदरीनाथ, कर्णप्रयाग और थराली सीट विधानसभा चुनाव के लिहाज से भाजपा और कांग्रेस के लिए खासा महत्व रखती है। दो सीटों पर भाजपा का दबदबा रहा है लेकिन एक सीट पर जो जीता उसने सरकार बनाई है। ऐसे में चमोली जिलों की सीट पर भाजपा, कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए बदरी-विशाल के आशीर्वाद की आवश्यकता है।

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बदरीनाथ सीट बदरी विशाल का आशीर्वाद तो बन गई सरकार
चमोली जिले में बदरीनाथ विधानसभा सीट वीआईपी सीट में से एक प्रमुख सीट है। वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य गठन के बाद बदरीनाथ सीट अस्तित्व में आई। 2009 में परिसीमन के चलते नंदप्रयाग सीट का विलय भी बदरीनाथ में हुआ। गंगोत्री की तरह ही राज्य गठन के बाद इस सीट पर भी यह मिथक जुड़ गया है कि बदरीनाथ सीट से जिस भी दल का विधायक जीता, राज्य में उसी दल की सरकार चुनकर आती है। इस सीट पर जनता ने भाजपा और कांग्रेस को बारी-बारी से मौका दिया है। इस बार भी भाजपा और कांग्रेस में सीधी टक्कर मानी जा रही है। भाजपा के सिटिंग विधायक महेंन्द्र भट्ट और कांग्रेस के राजेंद्र सिंह भंडारी फिर से आमने सामने हैं। ऐसे में ये भी सवाल उठता है कि क्या इस बार भी बदरीनाथ का मिथक बना रहेगा, या फिर महेंद्र भट्ट इतिहास रचने में कामयाब रहेगा। बदरीनाथ विधानसभा की सड़क, पॉलिटेक्निक, चिकित्सा और आपदा की स्थिति में हालातों से न निपटने की समस्या आज भी बनी हुई है। इस सीट पर माना जाता है कि जिसे भगवान बदरी विशाल का आशीर्वाद मिल जाए, वो ही विधायक बनता है। साथ ही इस सीट पर जातिगत समीकरण काफी अहम माने जाते हैं।

राज्य बनने के बाद अब तक के विधायक-

  • अनसूया प्रसाद भट्ट- 2002- कांग्रेस
  • केदार सिंह फोनिया- 2007- भाजपा
  • राजेंद्र सिंह भंडारी- 2012- कांग्रेस
  • महेंद्र प्रसाद भट्ट- 2017- भाजपा
  • कुल मतदाता- 102128
  • पुरुष-52626
  • महिला-49499

कर्णप्रयाग सीट पर भाजपा का दबदबा, बागी भी है मैदान में
चमोली जिले की सबसे हॉट सीट कर्णप्रयाग विधानसभा सीट आती है। इस सीट के क्षेत्र में ही गैरसेंण, भराड़ीसैंण आता है। जहां उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी है। राजनीतिक दृष्टि ये कर्णप्रयाग सीट पर भाजपा का दबदबा रहा है। 2002, 2007, 2017 में भाजपा और 2012 में इस सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी जीते। इस बार इस सीट पर निर्दलीय भाजपा, कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। कांग्रेस ने मुकेश नेगी, भाजपा ने पूर्व विधायक अनिल नौटियाल को प्रत्याशी बनाया हैं, जिसके बाद से दावेदारी कर रहे टीका प्रसाद मैखुरी निर्दलीय चुनाव मैदान में ​है। जो भाजपा के समीकरण बिगाड़ सकते हैं। कर्णप्रयाग​ विधानसभा में पानी, राजधानी, जंगली जानवरों का आतंक, पलायन, सड़क, स्वास्थ प्रमुख समस्याएं हैं।

  • कुल मतदाता- 93880
  • पुरूष मतदाता- 47058
  • महिला मतदाता- 46822
  • अब तक के विधायक-
  • अनिल नौटियाल, 2002, 2007, भाजपा।
  • डॉ. अनसुया प्रसाद मैखुरी- 2012 कांग्रेस।
  • सुरेंद्र सिंह नेगी- 2017 भाजपा।

थराली दबदबा भाजपा का, कांग्रेस भी है फाइट में
चमोली जिले की दूसरी अहम सीट थराली सुरक्षित सीट है। 2008 के परिसीमन से पहले इस क्षेत्र का नाम पिंडर विधानसभा सीट था। इस सीट पर भाजपा का दबदबा रहा है। अब तक के 4 चुनावों में 3 बार भाजपा ही जीतकर आई है। यहां से 2002 में भाजपा के गोविंद लाल 2007 में भाजपा के जीएल शाह 2012 कांग्रेस के जीतराम टम्टा 2017 बीजेपी के मगनलाल शाह ​विधायक चुनकर आए। लेकिन 2018 विधायक के निधन के बाद उनकी धर्म पत्नी मुन्नी देवी उपचुनाव में जीतकर विधायक बनीं। हालांकि इस बार पार्टी ने उनका टिकट काट कर भोपालराम टम्टा को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस से एक बार फिर प्रो जीतराम ​चुनाव मैदान में हैं। जो कि कांग्रेस के दलित चेहरे और कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में इस बार चुनाव में सीधी टक्कर मानी जा रही है। थराली विधानसभा सीट में आज भी लोगों की पानी, बिजली, सड़क, स्वास्थ आदि मूलभूत समस्याएं हैं। पर्यटन के लिहाज से भी ये क्षेत्र काफी अहम माना जाता है। नंदा राजजात यात्रा इसी सीट के अंदर में एक और आती है। ऐसे में पर्यटन की भी यहां अपार संभावनाएं हैं।

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