कौन है करप्शन किंग पूर्व IAS विनोद कुमार? कोर्ट ने 12वीं बार सुनाई सजा, अभी बाकी हैं पेंडिंग केस की फाइलें

Who is Former IAS Officer Vinod Kumar: ओडिशा के प्रशासनिक गलियारों में 'भ्रष्टाचार के बेताज बादशाह' कहे जाने वाले पूर्व IAS अधिकारी विनोद कुमार एक बार फिर सुर्खियों में हैं। शुक्रवार को भुवनेश्वर की स्पेशल विजिलेंस कोर्ट ने ओडिशा ग्रामीण आवास विकास निगम (ORHDC) घोटाले में उन्हें और 6 अन्य साथियों को दोषी करार देते हुए 3 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

यह विनोद कुमार के करियर की 12वीं सजा है, जो यह बताने के लिए काफी है कि उन्होंने व्यवस्था की जड़ों को किस कदर खोखला किया था।

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गरीबों की छत छीनकर बिल्डर की तिजोरी भरी

इस पूरे घोटाले की जड़ें गरीबों के उस हक से जुड़ी हैं, जिसे बड़ी ही चालाकी से सफेदपोशों ने डकार लिया। विजिलेंस की जांच में सामने आया कि विनोद कुमार और उनके सहयोगियों ने 'M/S-Ecstasy Builders & Developers Pvt. Ltd' के साथ मिलकर एक ऐसा मायाजाल बुना, जिससे सरकारी खजाने को 52.95 लाख का चूना लगा।

इन अधिकारियों ने अपने पद की गरिमा को ताक पर रखकर जाली दस्तावेज तैयार किए और वह पैसा जो गांव के बेघर लोगों के नसीब में होना चाहिए था, उसे एक निजी बिल्डर की ओर मोड़ दिया।

लाशों के ढेर और मलबे के बीच रची गई 'साजिश'

विनोद कुमार का यह काला इतिहास उस दौर से शुरू होता है जब साल 1999 में आए सुपर साइक्लोन ने ओडिशा को श्मशान बना दिया था। जब पूरा राज्य अपनों को खोने के गम में डूबा था और लाखों लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर थे, तब ORHDC के मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर विनोद कुमार पुनर्निर्माण के नाम पर 'सौदा' कर रहे थे।

उन्होंने बिना किसी जमीनी पड़ताल के करीब 33.34 करोड़ का हाउसिंग फंड उन रियल एस्टेट कंपनियों और फर्जी एनजीओ को बांट दिया, जिनका वजूद सिर्फ कागजों पर था। आपदा के उस दौर में पीड़ितों की मदद करने के बजाय, कुमार ने इसे अपनी तिजोरी भरने के 'अवसर' में बदल दिया।

Who is Vinod Kumar: कौन हैं विनोद कुमार?

विनोद कुमार कोई साधारण भ्रष्ट अधिकारी नहीं हैं, बल्कि उनके नाम के साथ सजाओं का एक अनोखा 'रिकॉर्ड' जुड़ा है। 1989 बैच के इस अधिकारी पर राज्य सरकार ने कुल 27 विजिलेंस केस दर्ज किए थे, जिनमें से 12 मामलों में अदालत ने उन्हें अपराधी माना है, जबकि 15 केस अब भी कतार में हैं।

उनके लगातार सामने आते घोटालों को देखते हुए केंद्र सरकार ने 2022 में उनके खिलाफ कड़ा कदम उठाया और उन्हें सेवा से बर्खास्त (Dismissed) कर दिया। उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई, जो किसी भी आईएएस अधिकारी के लिए सबसे अपमानजनक विदाई मानी जाती है।

जेल की सलाखें और कानून का कड़ा संदेश

अदालत ने इस मामले में केवल विनोद कुमार ही नहीं, बल्कि उनके पूरे 'सिस्टम' को लपेटे में लिया है। सजा पाने वालों में पूर्व सचिव स्वस्ती रंजन महापात्र से लेकर रिकवरी असिस्टेंट तक शामिल हैं, जिन्होंने इस भ्रष्टाचार में मूक सहमति या सक्रिय भागीदारी निभाई थी।

अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि मानवता के खिलाफ अपराध था। 3 साल की इस ताजा सजा ने साफ कर दिया है कि भले ही फाइलें धूल खा रही हों, लेकिन जब कानून का चाबुक चलता है, तो बड़े से बड़े 'सूरमा' को भी सलाखों के पीछे जाना ही पड़ता है।

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