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Viral News: फाइन दो या ट्रेडिशनल पहनो! ऑफिस के अजीबोगरीब नियम ने इंटरनेट पर मचाया हंगामा

Viral News: ऑफिस कल्चर को "मज़ेदार" और "इंगेजिंग" बनाने के नाम पर कई कंपनियां तरह-तरह की पहल करती हैं, लेकिन हाल ही में सामने आया एक मामला सोशल मीडिया पर तीखी बहस का कारण बन गया है।

दरअसल, सोशल मीडिया पर एक कर्मचारी ने दावा किया है कि उसकी कंपनी ने शुक्रवार को पारंपरिक कपड़े न पहनने पर कर्मचारियों से पैसे वसूलने का नियम लागू कर दिया है। इस मामले का खुलासा एक Reddit यूज़र की पोस्ट से हुआ, जिसने अपनी कंपनी की नई पॉलिसी "Traditional Fridays" को लेकर नाराज़गी जताई।

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पोस्ट के मुताबिक, कंपनी के HR विभाग ने ईमेल भेजकर बताया कि जो कर्मचारी शुक्रवार को ट्रेडिशनल ड्रेस में नहीं आएंगे, उनसे ₹100 का "योगदान" लिया जाएगा। वहीं, सीनियर मैनेजमेंट के लिए यह अमाउंट ₹500 तय की गई है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

Reddit पोस्ट में कर्मचारी ने लिखा,-"मुझे अभी HR से यह ईमेल मिला है। क्या इनके पास करने के लिए और कुछ नहीं है?" उसने बताया कि कंपनी में पहले "Casual Fridays" हुआ करता था, जो शुरुआती छह महीनों तक चला। इसके बाद इसे बदलकर "Formals/Traditional Fridays" कर दिया गया।

कर्मचारी ने कहा कि वह आमतौर पर फॉर्मल कपड़े पहनकर आता है क्योंकि उसके पास सिंपल इंडियन वियर नहीं हैं और वह सिर्फ ऑफिस के लिए नए कपड़ों में निवेश नहीं करना चाहता। लेकिन जब HR ने यह नया नियम भेजा कि ट्रेडिशनल कपड़े न पहनने पर पैसे देने होंगे, तो उसका सब्र जवाब दे गया। उसने सवाल उठाया-क्या यह कानूनी है?"

'लहंगा पहनकर आऊं और कहूं ट्रेडिशनल है?'

कर्मचारी ने मज़ाकिया लेकिन तंज भरे अंदाज़ में लिखा, "मन कर रहा है कि मैं लहंगा पहनकर ऑफिस जाऊं और कहूं यह ट्रेडिशनल है, ताकि इन्हें चिढ़ा सकूं।"

यह लाइन सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो गई और यूज़र्स ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। एक यूज़र ने लिखा-"बस जवाब दे दो-मेरे पास पैसे नहीं हैं। जब Secret Santa के लिए मैसेज आया था, तब भी मैंने यही कहा था क्योंकि इस साल इन्क्रीमेंट नहीं मिला।"

क्या ऐसा जुर्माना वाकई कानूनी है?

कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस मुद्दे को कानूनी नजरिए से भी देखा। आम राय यही रही कि जब तक किसी कर्मचारी के एग्रीमेंट या नियुक्ति पत्र में साफ तौर पर किसी तरह की आर्थिक पेनल्टी का ज़िक्र न हो, तब तक कंपनी इस तरह का जुर्माना नहीं लगा सकती। विशेषज्ञों के अनुसार, ऑफिस में ड्रेस कोड तय करना एक हद तक मैनेजमेंट का अधिकार हो सकता है, लेकिन कर्मचारियों से पैसे वसूलना या "योगदान" के नाम पर दबाव बनाना कानूनी रूप से सवालों के घेरे में आ सकता है।

वर्कप्लेस कल्चर पर फिर खड़ा हुआ सवाल...

यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि वर्कप्लेस कल्चर को बेहतर बनाने और कर्मचारियों पर नियम थोपने के बीच की रेखा कहां खिंचनी चाहिए। जहां कुछ लोग "Traditional Fridays" को संस्कृति से जोड़कर देखते हैं, वहीं कई कर्मचारियों का मानना है कि ड्रेस का चुनाव व्यक्तिगत मामला होना चाहिए।

फिलहाल यह बहस सोशल मीडिया तक सीमित है, लेकिन इसने कॉर्पोरेट दुनिया में HR पॉलिसी, कर्मचारियों के अधिकार और "फन एक्टिविटीज़" के नाम पर बढ़ती सख्ती पर एक नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।

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