Premanand Maharaj ने प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए ये क्या कह दिया? होली और चंद्रग्रहण पर दिया शॉकिंग बयान
Premanand Maharaj: भक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान के लिए प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज इन दिनों फिर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर उनके प्रवचन और धार्मिक संदेश अक्सर वायरल होते रहते हैं।
होली से पहले ग्रहण ने बढ़ाई लोगों की चिंता
इस बार होली (Holi 2026) के पर्व से ठीक पहले लगने वाले चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2026) को लेकर लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। आखिर होलिका दहन कब होगा और रंगों की होली किस दिन खेली जाएगी? इसी भ्रम को दूर करने के लिए प्रेमानंद महाराज ने महत्वपूर्ण जानकारी शेयर की है।

3 मार्च 2026 को लगेगा चंद्र ग्रहण
-धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लग रहा है, जो भारत में भी दिखाई देगा। ग्रहण के कारण सूतक काल लागू रहेगा जिसके चलते कई धार्मिक नियमों का पालन करना आवश्यक माना जाता है।
-प्रेमानंद महाराज ने कहा कि सूतक काल के दौरान अत्यधिक उत्सव, शोर-शराबा या रंग खेलना उचित नहीं माना जाता और इस समय संयम और भक्ति का मार्ग अपनाना चाहिए।
कब होगा होलिका दहन और कब खेली जाएगी होली?
प्रेमानंद महाराज के अनुसार पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को पड़ने के कारण होलिका दहन उसी दिन किया जाएगा जबकि रंगों वाली होली 4 मार्च 2026 को मनाना शुभ रहेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि ग्रहण काल में उत्सव से अधिक आध्यात्मिक साधना पर ध्यान दें।
सूतक काल में क्या करें और क्या न करें?
प्रेमानंद महाराज ने ग्रहण के दौरान कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी है-
-सूतक काल में अनावश्यक शोर और उत्सव से बचें
-ईश्वर का नामजप और ध्यान करें
-धार्मिक अनुशासन बनाए रखें
-ग्रहण के समय घर में शांत वातावरण रखें
प्रेमानंद महाराज के अनुसार चंद्रग्रहण का समय शाम के बाद प्रभावी रहेगा लेकिन सूतक काल सुबह से ही लागू माना जाएगा।
प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए विशेष सावधानी
प्रेमानंद महाराज ने खासतौर पर गर्भवती महिलाओं को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि ग्रहण के दौरान धारदार वस्तुओं जैसे चाकू, कैंची या सुई का इस्तेमाल न करें और संभव हो तो घर के अंदर ही रहें। साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि चंद्रग्रहण के समय सोने या बाहर निकलने से बचें और अधिक से अधिक समय भगवान के नाम स्मरण में बिताएं।
महाराज ने दिया भक्ति और संयम का संदेश
प्रेमानंद महाराज का कहना है कि ग्रहण काल आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष समय माना जाता है। इस दौरान भक्ति और ध्यान करने से नकारात्मक प्रभावों से बचाव संभव है। उनका संदेश है कि होली का उत्सव जरूर मनाएं लेकिन धार्मिक नियमों और परंपराओं का सम्मान करते रहें।
चंद्र ग्रहण ने बदली धार्मिक गणना
होली के उत्साह के बीच इस बार चंद्र ग्रहण ने धार्मिक गणनाओं को थोड़ा बदल दिया है। ऐसे में संतों और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सही समय और नियमों का पालन करने से त्योहार का महत्व और भी बढ़ जाता है।
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