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Parakram Diwas 2026: PM मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को दी श्रद्धांजलि, क्यों मनाया जाता है पराक्रम दिवस?

Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 2026: भारत सरकार ने देश के महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और बलिदान को सम्मान देने के लिए हर साल 23 जनवरी को 'पराक्रम दिवस' (Parakram Diwas) के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

यह फैसला साल 2021 से लागू किया गया, जब नेताजी की जयंती के अवसर पर उनकी 125वीं जन्म जयंती वर्ष की शुरुआत हुई। सरकार का उद्देश्य इस दिन के माध्यम से देशवासियों, विशेषकर युवाओं में साहस, संकल्प और देशभक्ति की भावना को और मजबूत करना है।

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Subhas Chandra Bose Birthday: 125वीं जयंती को भव्य रूप से मनाने का फैसला

भारत सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जन्म जयंती को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गरिमापूर्ण ढंग से मनाने का निर्णय लिया था। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया, जिसे इस स्मृति वर्ष के कार्यक्रम तय करने, उनका मार्गदर्शन करने और निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई।

इस समिति ने देश और विदेश में कई आयोजनों की रूपरेखा तैयार की, ताकि नेताजी के विचार और योगदान को व्यापक स्तर पर जन-जन तक पहुंचाया जा सके।

Parakram Diwas 2026: क्यों मनाया जाता है पराक्रम दिवस?

'पराक्रम दिवस' नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन पर मनाया जाता है। 'पराक्रम' का अर्थ है वीरता और साहस, और यह शब्द नेताजी के व्यक्तित्व और उनके संघर्ष को पूरी तरह परिभाषित करता है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में नेताजी की भूमिका असाधारण रही।

आज़ाद हिंद फौज के गठन से लेकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष की प्रेरणा देने तक, उनका योगदान देश के इतिहास में अमिट है। सरकार ने 2021 में पहली बार पराक्रम दिवस मनाया, जो नेताजी की 124वीं जयंती का वर्ष था। इसका उद्देश्य उनके अद्वितीय साहस, आत्मबलिदान और राष्ट्र सेवा को याद करना और भावी पीढ़ियों को उससे प्रेरणा देना है।

PM Modi Pays Tribute: प्रधानमंत्री मोदी ने दी श्रद्धांजलि

पराक्रम दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें निडर नेतृत्व और अटूट देशभक्ति का प्रतीक बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर किए गए कई पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा, "पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जाने वाली नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर हम उनके अदम्य साहस, संकल्प और राष्ट्र के लिए अतुलनीय योगदान को स्मरण करते हैं। उनके आदर्श आज भी मजबूत भारत के निर्माण के लिए पीढ़ियों को प्रेरित करते हैं।"

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि नेताजी हमेशा उनके लिए प्रेरणा स्रोत रहे हैं। उन्होंने याद किया कि जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब 23 जनवरी 2009 को उन्होंने नेताजी को सम्मान देने के लिए ई-ग्राम विश्वग्राम योजना की शुरुआत की थी। यह योजना गुजरात के आईटी परिदृश्य को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी। यह योजना हरिपुरा से शुरू की गई थी, जो नेताजी के जीवन से भी जुड़ा एक ऐतिहासिक स्थान रहा है।

नेताजी से जुड़े ऐतिहासिक फैसले

प्रधानमंत्री ने नेताजी से जुड़े कई अहम कदमों का भी जिक्र किया। इनमें नेताजी से संबंधित गोपनीय फाइलों और दस्तावेजों का अवर्गीकरण (Declassification) एक ऐतिहासिक फैसला रहा। उन्होंने बताया कि 2018 भी एक ऐतिहासिक वर्ष था, जब लाल किले पर आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मनाई गई और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में नेताजी द्वारा तिरंगा फहराने की 75वीं वर्षगांठ भी मनाई गई।

इसी दौरान रॉस आइलैंड समेत तीन द्वीपों का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप रखा गया। इसके अलावा लाल किले में बने क्रांति मंदिर संग्रहालय में नेताजी और आज़ाद हिंद फौज से जुड़ी कई ऐतिहासिक वस्तुएं संरक्षित की गई हैं, जिनमें नेताजी द्वारा पहनी गई टोपी भी शामिल है।

इंडिया गेट के पास नेताजी की भव्य प्रतिमा

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलने और नेताजी के प्रति सम्मान का एक बड़ा उदाहरण इंडिया गेट के पास उनकी भव्य प्रतिमा की स्थापना है। यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी और देशवासियों को नेताजी के साहस और बलिदान की याद दिलाती रहेगी।

पराक्रम दिवस का संदेश

पराक्रम दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि यह देशवासियों को साहस, आत्मबल और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा देने का अवसर है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन आज भी यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प और देशप्रेम के साथ आगे बढ़ा जा सकता है। इसी भावना को जीवित रखने के लिए हर साल 23 जनवरी को पराक्रम दिवस मनाया जाता है।

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