'हर हिन्दू करे 4 बच्चे पैदा', बागेश्वर धाम वाले Dhirendra Shastri का नया फार्मूला, जाति-धर्म पर भी कही बड़ी बात
Dhirendra Shastri Controversy: बागेश्वर धाम के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र शास्त्री एक बार फिर चर्चाओं में हैं। वजह है उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में आयोजित एक भव्य धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम के दौरान उनका बयान। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक ऐसा संबोधन दिया है, जिसने पूरे देश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
'हनुमंत कथा' के मंच से बोलते हुए उन्होंने न केवल हिंदू एकता का आह्वान किया, बल्कि जातिवाद, जनसंख्या संतुलन और राष्ट्रवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी बेबाक राय रखी। उनके बयानों के वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहे हैं। उनके इस वीडियो से एक नई बहस छिड़ गई है।

धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि हिंदू समाज अपनी आंतरिक कड़ियों को नहीं जोड़ता है, तो भविष्य की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने तिरंगे के मान-सम्मान और देश की अखंडता को लेकर भी ऐसी टिप्पणियां कीं, जो अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का मुख्य केंद्र बन गई हैं।
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Dhirendra Shastri: 'तिरंगे में चांद आया तो कोई नहीं बचेगा'
बांदा के मंच से धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने देश की एकता पर प्रहार करने वाली ताकतों को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, 'जिस दिन तिरंगे में चांद आ गया, उस दिन न तो शर्मा बचेंगे, न वर्मा बचेंगे और न ही कोई अन्य जाति बचेगी।' उन्होंने बांग्लादेश की हालिया घटनाओं का उदाहरण देते हुए समाज को आगाह किया कि बंटवारा हमेशा विनाश लाता है। शास्त्री ने जोर देकर कहा कि अगर देश सुरक्षित नहीं रहेगा, तो किसी भी वर्ग या जाति की सुरक्षा संभव नहीं होगी।
जातिवाद पर प्रहार, 'शर्मा-वर्मा नहीं, केवल हिंदू'
कथावाचक ने हिंदू समाज के भीतर गहरी जड़ों तक फैले जातिवाद को समाज का सबसे बड़ा दुश्मन बताया। उन्होंने कहा कि लोग खुद को जातियों (अगड़ा-पिछड़ा) में बांटकर अपनी असली ताकत भूल रहे हैं।
धीरेंद्र शास्त्री के अनुसार, अन्य समुदायों में आपसी मतभेद होने के बावजूद वे धर्म के नाम पर एक हो जाते हैं, लेकिन हिंदू समाज अभी भी जातियों में उलझा हुआ है। उन्होंने आह्वान किया कि व्यक्ति की पहली और एकमात्र पहचान 'हिंदू' होनी चाहिए, न कि उसकी जाति।
'2 बच्चे घर के लिए, 2 राष्ट्र के लिए'
जनसंख्या के मुद्दे पर धीरेंद्र शास्त्री ने एक नया फार्मूला पेश किया जिसने सबको हैरान कर दिया। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को अपनी घटती संख्या को लेकर गंभीर होना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक हिंदू परिवार को कम से कम चार बच्चे पैदा करने का सुझाव दिया।
उन्होंने विस्तार से बताया कि इनमें से दो बच्चे परिवार संभालें, एक बच्चा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को और एक बच्चा हिंदू राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा तभी संभव है जब संख्या बल मजबूत होगा।
शिक्षा पद्धति और 'ग' से गणेश बनाम गधा
अपने संबोधन में उन्होंने आधुनिक शिक्षा पद्धति पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पहले स्कूलों में 'ग' से गणेश पढ़ाया जाता था जिससे बच्चों में संस्कार आते थे, लेकिन अब 'ग' से गधा पढ़ाया जा रहा है। उन्होंने इसे एक साजिश बताते हुए कहा कि बच्चों को अपनी संस्कृति और वेदों से दूर किया जा रहा है, जिसे रोकने के लिए वे स्वयं 'गुरुकुल' और कैंसर अस्पताल जैसी संस्थाएं बना रहे हैं।












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