हरियाणा के एससी वर्ग के नेताओं को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने पर आपत्ति नहीं
चंडीगढ़। शीर्ष न्यायालय के आर्थिक आरक्षण पर दिए फैसले को हरियाणा के अनुसूचित जाति के नेता भी राजनीति और सामाजिक रूप से अहम मान रहे हैं। इन नेताओं को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने पर कोई आपत्ति नहीं है। हरियाणा के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के अध्यक्ष उदयभान का कहना है कि उनकी पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर इस फैसले का स्वागत किया है।

उदयभान ने कहा कि यह संशोधन 2005-06 में सिहो आयोग की नियुक्ति के साथ डा. मनमोहन सिंह की सरकार के प्रयासों का परिणाम है। आयोग ने जुलाई 2010 में इस बाबत अपनी रिपोर्ट दी थी। अनुसूचित जाति वर्ग के नेता उदयभान का कहना है कि गरीब सवर्णों को आरक्षण के मुद्दे पर अब सिर्फ यही देखना रह गया है कि पहले शीर्ष अदालत की बड़ी पीठ ने आरक्षण सिर्फ 50 फीसद देने का फैसला दिया हुआ है। इस फैसले के मूल भाव पर तो इसका कोई असर नहीं है।
हरियाणा प्रदेश कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष कुमारी सैलजा का कहना है कि शीर्ष अदालत के फैसले के बाद जब पार्टी स्तर पर यह कह दिया गया है कि इस फैसले को लागू करवाने में कांग्रेस साथ है तो आगे कोई बात नहीं रह जाती। व्यक्तिगत रूप से भी इस मुद्दे पर यदि किसी कांग्रेस नेता की कोई विचार भिन्नता है तो राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में इसके कोई मायने नहीं रह जाते।
सैलजा का कहना है कि भाजपा सरकार को अब यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आरक्षण के असल हकदारों को उनका हक मिल जाए। राज्यसभा सदस्य और भाजपा नेता कृष्ण लाल पंवार का कहना है कि यह गरीब से जुड़ा मुद्दा है। इस पर जातिगत आधार पर किसी को कुछ नहीं बोलना चाहिए। गरीब और जरूरतमंद की कोई जाति नहीं होती।












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