UP के 27 मेडिकल कॉलेजों में शुरू की जाएगी टेली मेडिसिन की सुविधा, डीजीएमई ने भेजा प्रस्ताव
UP के 27 मेडिकल कॉलेजों में शुरू की जाएगी टेली मेडिसिन की सुविधा, डीजीएमई ने भेजा प्रस्ताव
लखनऊ, 12 नवंबर: प्रदेश के 27 मेडिकल कॉलेजों में टेली मेडिसिन की सुविधा शुरू की जाएगी। इसका नोडल सेंटर एसजीपीजीआई बनेगा। इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय ने एसजीपीजीआई को प्रस्ताव भेजा है। इससे जरूरत पड़ने पर मरीजों के उपचार में एसजीपीजीआई के विशेषज्ञ परामर्श दे सकेंगे। साथ ही डॉक्टरों, नर्सिंग स्टॉफ, पैरामेडिकल स्टॉफ को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। मेडिकल कॉलेजों में इलाज की गुणवत्ता बढ़ेगी।

एसजीपीजीआई में करीब 20 साल से टेलीमेडिसिन की सुविधा चल रही है। इससे कुछ जिला एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जोड़े गए हैं। विदेशों से आने वाले विशेषज्ञ भी यहां की टेली मेडिसिन सुविधाओं को सीख कर अपने देश के अस्पतालों में इसे बढावा दे रहे हैं। कोविड कॉल के दौरान टेली मेडिसिन का दायरा बढ़ा और टेली मेडिसिन के जरिए एसजीपीजीआई और केजीएमयू के विशेषज्ञों ने विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के इंटेसिव केयर यूनिट (आईसीयू) का संचालन किए। कोविड खत्म होन के बाद भी प्रदेश में 200 बेड का आईसीयू एसजीपीजीआई के टेली मेडिसिन सेंटर से जोड़ा गया है।
इसमें एसजीपीजीआई के क्रिटिकल केयर विभाग के बेडों के अलावा बीआरडी मेडिकल कॉलेज के 40 बेड और कानपुर, मेरठ, आगरा, झांसी, प्रयागराज के 20-20 बेड का संचालन किया जा रहा है। इसके फायदे को देखते हुए टेली मेडिसिन को बढावा दिया जा रहा है। अब नए सिरे से 27 मेडिकल कॉलेजों को जोड़ने की कवायद शुरू हुई है। इसमें छह पुराने मेडिकल कॉलेजों के अलावा नवनिर्मित राजकीय एवं स्वायत्तशासी मेडिकल कॉलेजों को शामिल किया जाएगा।
इन मेडिकल कॉलेजों का चयन करने की प्रक्रिया चल रही है। डीजीएमई की ओर से एसजीपीजीआई को प्रस्ताव दिया गया कि प्रदेश के 27 मेडिकल कॉलेजों में टेली मेडिसिन की सुविधा शुरू की जानी है। इसके लिए कोविड इंफ्रास्ट्रक्चर मद में मिली धनराशि से संसाधनों का विकास किया जाएगा। एसजीपीजीआई नोडल सेंटर के रूप में इन मेडिकल कॉलेजों में टेली मेडिसिन की स्थापना से लेकर उनकेसंचालन तक की जिम्मेदारी निभाएगा। एसजीपीजीआई के टेली मेडिसिन प्रभारी प्रो. एसके मिश्रा और प्रो पीके प्रधान ने बताया कि डीजीएमई से मिले प्रस्ताव से प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार होगा। 27 मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा क्षेत्र की नई विधा शुरू होने से इलाज और प्रशिक्षण की गुणवत्ता बढेगी।












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