तेलंगाना: महिला आरक्षण विधेयक के बाद अब बीआरएस ओबीसी आरक्षण पर करेगी फोकस

महिला आरक्षण विधेयक के संसद में पारित होने के बाद तेलंगाना की सत्‍तारुढ़ भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) अब ओबीसी आरक्षण विधेयक पर अपना ध्‍यान केंद्रित करेगी। बीआरएस ने कहा संसद में महिला आरक्षण बिल पास करवाने के बाद अब हमारी पार्टी ओबीसी आरक्षण विधेयक के लिए लड़ाई तेज करने की तैयारी कर रही है।

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इसके लिए बीआरएस समान विचारधारा वाले दलों को एकजुट करेगी और देश भर में खासकर तेलंगाना और महाराष्‍ट्र में रैलियां और बैठकें करेगी। इसके जरिए जनता का समर्थन हासिल करने के लिए रणनीति तैयार करने में जुट चुकी है।

विधेयक नहींं पारित करती है तो आंदोलन होगा तेज

बीआरएस विधायी निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के मुद्दे को लेकर कमर कस ली है, बीआरएस ने देश भर में ओबीसी की जनगणना करवाने का आह्वान किया है। इसके साथ ही बीआरएस ने कहा है अगर केंद्र सरकार ओबीसी आरक्षण विधेयक पारित करने में विफल रहती तो केसीआर की बीआरएस ने अपना आंदोलन तेज करने की कसम खाई है।

केसीआर विशाल रैली में उठा सकते हैं ये मुद्दा

बता दें पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के लिए मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने का विरोध कर रहा है। सूत्रों के अनुसार सीएम चंद्रशेखर 25 सितंबर को महाराष्‍ट्र के वर्धा में एक विशाल रैली कर रहे हैं जिसमें वो ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठा सकते हैं।

2014 में ही तेलंगाना ने पारित किया था प्रस्‍ताव

गौरतलब है कि 2014 में राज्य के गठन के तुरंत बाद तेलंगाना की पहली राज्य विधानसभा में महिला आरक्षण विधेयक और ओबीसी आरक्षण विधेयक दोनों के पक्ष में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया, जिसे बाद में मंजूरी के लिए केंद्र के पास भेजा था।

महिला आरक्षण विधेयक को पारित करवाने में बीआरएस की रही अहम भूमिका

बता दें तेलंगाना मुख्‍यमंत्री चंद्रशेखर राव ने खुद पीएम को पत्र लिखकर महिला आरक्षण विधेयक पारित करने की पैरवी की थी। इतना ही नहीं केसीआर ने अपनी पार्टी बीआरएस में चुनाव के दौरान महिलाओं को आरक्षण देने की शुरूआत 2019 में हुए तेलंगाना विधानससभा चुनाव में ही कर दी थी।

वहीं बीआरएस विधायक कविता ने महिला आरक्षण की मांग को लेकर दिल्‍ली के जंतर-मंतर में एक बड़ा विरोधी प्रदर्शन किया था। महिला आरक्षण बिल दोनों सदनों में पास होने के बाद तेलंगाना की सत्‍तारुढ़ पार्टी बीआरएस का अब पूरा ध्‍यान कानून के कार्यान्वयन के लिए भाजपा को जवाबदेह ठहराने की ओर केंद्रित है।

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