काबुल के 'करता परवन गुरुद्वारा' पर तालिबान का हमला, मनजिंदर सिरसा ने की हमले की निंदा
नई दिल्ली, अक्टूबर 06; शिरोमणि अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने काबुल के 'करता परवन गुरुद्वारा' पर तालिबान के हमले की निंदा की है। शिअद नेता सिरसा ने ट्विटर पर कहा कि तालिबान अधिकारी होने का दावा करने वाले लगभग 15 से 16 भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने गुरुद्वारे में प्रवेश किया और परिसर की तलाशी लेने की मांग की है। शिअद नेता ने आगे दावा किया कि सशस्त्र आतंकवादियों ने अपने तलाशी अभियान के दौरान सभी सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि तालिबान ने दावों का खंडन किया है और घटना में किसी भी तरह की संलिप्तता से साफ इंकार किया है।

सिरसा ने कहा, इस घटना से काफी दहशत है, लेकिन अफगानिस्तान में तालिबान नेतृत्व ने कहा है कि वह इस घटना में शामिल नहीं हैं। उन्होंने ऐसे किसी भी अधिकारी को गुरुद्वारा भेजने से इनकार कर दिया है। बता दें, अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हैं। उन्होंने भविष्य में होने वाली घटनाओं पर चिंता जताई और कहा कि अफगानिस्तान में सिख चिंतित हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि "गुरुद्वारा के अधिकारियों ने स्थानीय तालिबान नेता से मुलाकात की, जो दावा करते हैं कि अब तक इस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है। गुरुद्वारा करता परवन पर हमला करने वाले आतंकियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।" इस घटना के संबंध में बातचीत के अंत में सिरसा ने कहा कि वह स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं और अगर उन्हें कोई और जानकारी मिलती है तो लोगों को सूचित करेंगे।
बता दें, यह घटना मंगलवार को घटित हुई जब तालिबान होने का दावा करने वाले अज्ञात आतंकवादियों ने काबुल में करता परवन गुरुद्वारा पर हमला बोल दिया और पवित्र स्थल पर तोड़फोड़ की। इसके अलावा, आतंकवादियों ने गुरुद्वारे में घुसने के बाद कई लोगों को हिरासत में ले लिया।
इंडियन वर्ल्ड फोरम के अध्यक्ष पुनीत सिंह चंडोक ने कहा, मुझे काबुल से चौंकाने वाली रिपोर्ट मिली है। अज्ञात भारी हथियारों से लैस तालिबान अधिकारियों का एक समूह काबुल में गुरुद्वारा करता परवन में घुस गया है। एएनआई के अनुसार इस चौंकाने वाली घटना के बाद स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधन घटनास्थल पर पहुंचे। करता परवन गुरुद्वारा अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि चरमपंथी समूह ने गुरुद्वारे पर हमला किया है। इससे पहले तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद अफगान में कथित तौर पर बहाल होने से पहले देश के पक्तिया प्रांत में एक गुरुद्वारे की छत से सिखों के पवित्र ध्वज निशान साहिब को गुरुद्वारा थला साहिब से हटा दिया था। बता दें, यह ध्वज सिख समुदाय के लिए खास ऐतिहासिक महत्व रखता है क्योंकि यहां सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव द्वारा दौरा किया गया था।












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