Rajasthan: राजस्थान में सीएम गहलोत जातिगत सर्वे का दांव, कांग्रेस को होगा कितना फायदा
राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले गहलोत सरकार ने बड़ा दांव चला है। बिहार में महागठबंधन सरकार के बाद कांग्रेस ने राजस्थान में जातिगत जनगणना का आदेश जारी किया है। चुनाव को लेकर आचार संहिता से पहले सीएम गहलोत के इस निर्णय से अब राजस्थान में एक बड़ा मु्द्दा खड़ा हो गया है।
गहलोत सरकार के जातिगत जनगणना के आदेश से पहले इस हफ्ते शुक्रवार (6 अक्टूबर) को कांग्रेस की कोर कमेटी की पीसीसी के वॉर रूम में लंबी बैठक चली थी। बैठक में राज्य में जातीय जनगणना कराने पर सहमति बनी। जिसके बाद मीडिया से बातचीत में सीएम गहलोत ने कहा कि अब सरकार राजस्थान में जातिगत जनगणना के आदेश जारी करेगी। सीएम ने भरोसा दिलाया कि राजस्थान सरकार संविधान की भावना और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पूरी तरह ध्यान में रखते हुए ये निर्णय लेगी।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि राज्य सरकार अपने संसाधनों से जाति आधारित सर्वेक्षण कराएगी। सर्वे में नागरिकों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्तर के संबंध में जानकारी व आंकड़े एकत्रित किए जाएंगे। आंकड़ों के आधार पर वर्गों के पिछड़ेपन की स्थिति में सुधार लाने के लिए विशेष कल्याणकारी उपाय और योजनाएं लागू की जाएंगी।
कांग्रेस को कितना फायदा?
राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर एक सर्वे के मुताबिक बीजेपी और कांग्रेस में कड़ी टक्कर है। इतिहास में लंबे समय बाद ये होगा जब कोई सत्ताधारी पार्टी लगातार दूसरी बार कड़े मुकाबले में होगी। हालांकि यहां हर पांच साल में सरकार बदलती रही है। लेकिन इस बार 200 विधानसभा सीटों पर हुए सर्वे में भाजपा को 95 से 105 सीटें तो दूसरी ओर कांग्रेस को 91 से 101 सीट मिलती नजर आ रही हैं। इसके अलावा निर्दलीय और अन्य पार्टियों को 3-6 सीट मिल सकती है। इससे पहले 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 73 सीटों पर जीत मिली थी वहीं कांग्रेस ने 100 सीटों पर जीत हासिल की थी।












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