ओडिशा में महिला वोट बैंक भुनाने की होड़, BJD ने प्रमिला मलिक को विधानसभा अध्यक्ष बनाकर खेला दांव
ओडिशा में विधानसभा चुनाव के दौरान महिलाओं की देश के विकास में भागीदारी सुनिश्चित करना एक मुद्दा हो सकता है, जिस पर भाजपा और बीजू जनता दल दोनों में होड़ होगी। लेकिन नारी शक्ति वंदन विधेयक से पहले ही बीजेडी यहां महिलाओं को नेतृत्व में बढ़ चढ़कर मौका देती रही है। पिछले दिनों हुए निकाय चुनावों में ये बात साबित हुई। वहीं अब केंद्र के महिला आरक्षण बिल आने के साथ ही ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजेडी) ने प्रमिला मलिक को ओडिशा विधानसभा की पहली महिला अध्यक्ष बनाकर महिला कार्ड खेला है।
2024 के आम चुनावों को लेकर बीजेडी काफी हद तक महिला मतदाताओं पर भरोसा कर रहा है। ऐसे में महिला वोटर्स को लुभाने के लिए पार्टी ने पहले ही स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए स्कूटर योजना सहित कई योजनाएं शुरू कर दी हैं। दूसरी ओर ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजेडी) ने भी प्रमिला मलिक को ओडिशा विधानसभा की पहली महिला अध्यक्ष बनाया है।

वहीं एनडीए सरकार के लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित करके एक मजबूत महिला कार्ड खेला है। बीजद विधायक देबीप्रसाद मिश्रा ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने का हमारे मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का हमेशा से निर्णय रहा है और अब इसका परिणाम सामने आने लगा है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित होने के बाद, भाजपा खेमे में जश्न का माहौल है क्योंकि भगवा पार्टी आम चुनावों में शानदार प्रदर्शन करने के लिए महिला मतदाताओं पर भारी भरोसा कर रही है। पार्टी इस विधेयक को अपने अभियान का आधार बनाने जा रही है। उसने पहले ही यह संदेश देने का खाका तैयार कर लिया है कि वह महिलाओं के साथ है। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत सरकार ने नारी शक्ति वंदन विधेयक के जरिए देश की आबादी के 50 प्रतिशत हिस्से को विकास में पूरी तरह सहभागी होने का मौका दिया है।
वहीं कांग्रेस नेता संतोष सिंह सलूजा ने कहा कि भाजपा और बीजद केवल महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "भाजपा और बीजद महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए ये सभी हथकंडे अपना रहे हैं। लेकिन ये वोट कांग्रेस को मिलेंगे।"
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो कुछ ऐसे क्षेत्रों में केंद्र के नारी शक्ति वंदन विधेयक का चुनाव में भाजपा को फायदा हो सकता है, जहां उनकी पहले से सीटें है। ऐसे में इससे बीजेडी की सीटें प्रभावित नहीं होने वाली। पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि चूंकी ओडिशा में बीजेडी ने पहले से ही महिलाओं को नेतृत्व में प्रमुखता से मौका दिया है, ऐसे में चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर अधिक असर नहीं होगा।












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