पंजाब: भ्रष्टाचार के खिलाफ मान सरकार सख्त, कांग्रेस के वक्त में हुई शिकायतों पर भी एक्शन

जालंधर: पंजाब सरकार भ्रष्टाचार के केवल उन मामलों पर ही कारवाई करेगी, जिनकी शिकायतें पूर्व की कांग्रेस अथवा अकाली दल सरकार के समय हुई। तीन दिन पहले पंजाब के मुख्य सचिव की एक विशेष बैठक इन्हीं मामलों को लेकर हुई, जिसमे विभिन्न विभागों के प्रबंधकीय सचिव शामिल हुए। इस बैठक में ही यह बात स्पष्ट हुई कि शायद ही कोई विभाग होगा, जिसके अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार की शिकायतें न हुई हो। बैठक में इन शिकायतों को गंभीरता से लेने को कहा गया।

Bhagwant Mann

यहां यह गौरतलब है कि पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के पास करीब 100 से अधिक मामले ऐसे है, जो सरकार की स्वीकृति की इंतजार कर रहे है। इनमे से अधिकतर मामले ऐसे है, जिसमे पूर्व मंत्रियों और बड़े अधिकारियों के नाम शामिल है। बड़े मामलों में टेंडर घोटाला, खनन घोटाला, सिंचाई विभाग घोटाला, दलित कल्याण विभाग, आबकारी विभाग घोटाला, पी.डब्लू.डी, कृषि विभाग, खेल विभाग, स्थानीय सरकार विभाग, जेल विभाग समेत अनेक विभाग ऐसे है, जिनके विरुद्ध फंड अनिअमित्ताओं के आरोप लग चुके है, शिकायतें भी आ चुकी है और कुछ की तो जांच भी हो चुकी है। केवल सिंचाई विभाग की बात करें तो अनियमितता के मामले में 200 से अधिक अधिकारी चार्ज शीट किए जा चुके है और अगर उन अधिकारियों के जवाब भी संतुष्टिजनक नहीं पाए गए, तो उनके मामले भी विजिलेंस के पास जा सकते है। अतीत की सरकारों ने इन मामलों पर कारवाई करने की बजाए इन्हें दबा दिया था। जैसे पूर्व मंत्री साधू सिंह धर्मसोत का वजीफा घोटाला इनमे से एक था। इसमे पूर्व की सरकार रहते ही जांच भी हो गई थी परन्तु सरकार ने उन्हें बचाए रखा। प्राप्त जानकारी अनुसार करीब 70 नई शिकायतों का पुलिंदा तैयार होकर विजिलेंस विभाग से मुख्य सचिव के कार्यालय में जाने के लिए तैयार किया गया है। इसमें लगभग सभी विभागों के अधिकारियों के विरुद्ध शिकायतें है। सभी शिकायतें पूर्व की सरकार के समय की है जबकि पूर्व के और अब की सरकार के समय से लेकर 500 से अधिक मामले विजिलेंस के पास कारवाई के लिए पड़े है। प्रतिदिन कोई न कोई अधिकारी/कर्मचारी रिश्वत के मामले में पकड़ा जा रहा है और विजिलेंस के पास मामलों का ढेर बढ़ रहा है।

तीन दिन पूर्व पंजाब के मुख्य सचिव की हुई बैठक में शामिल विभिन्न विभागों के प्रबंधकीय सचिवों को कहा गया है कि राज्य के खजाने को लूटने वाले जिन नेताओं और अधिकारियों के विरुद्ध शिकायतें हुई है और वो फाइलों में ही दबी रह गई हो। उन शिकायतों को निकाला जाए और कार्रवाई के लिए भेजा जाए। इस बैठक में शिकायतों के विवरण की भी चर्चा की गई। दिलचस्प बात यह भी है कि विजिलेंस ब्यूरो द्वारा जिन जिन नेताओं के विरुद्ध कारवाई की जा रही है अथवा कारवाई की अनुमति मांगी जा रही है। उन पर अपनी पार्टी की सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के आरोप है और इनमे अधिकारी वर्ग भी शामिल है। मुख्यमंत्री ने भी मुख्य सचिव को उन शिकायतों को स्वीकृति देने के निर्देश दिए है, जो शिकायतें विजिलेंस ब्यूरो ने मुख्य सचिव के पास अनुमति के लिए भेजी है। अतीत में इसी सरकार ने पूर्व के मुख्य सचिव को इसलिए इस पद से हटा दिया था क्योंकि उन्होंने सिंचाई विभाग से सम्बंधित घोटाले में आई.ए.एस. अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने में देरी दिखाई थी।

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