सड़े गेहूं में चोरी करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा: दुष्यंत चौटाला

उपमुख्यमंत्री चौटाला यहां पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एक एक दाना जो आज ऑक्सन हुआ है, उसमें कैसे खराबी आई है। इसकी पूरी रिपोर्ट ली जाएगी ना कि एक व्यक्ति या एक गोदाम की।

Officers stealing rotten wheat will not be spared: Dushyant Chautala

हरियाणा के आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में षड्यंत्र के तहत करोड़ों रुपए की गेहूं सडाने के मामले में दोषी अधिकारी अब हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की रडार पर आ गए हैं। डिप्टी सीएम का कहना है कि जिन अधिकारियों के समय में करोड़ों रुपए का गेहूं खराब हुआ है, उन सभी की डिटेल ली जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी दोषी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।

दुष्यंत चौटाला ने कहा कि मेरे संज्ञान में करोड़ों रुपए की गेहूं को जानबूझ कर सड़ाने की बात आई है। उन्होंने कहा कि इस गेहूं को षड्यंत्र के तहत खराब कर अपने फायदे के लिए कौड़ियों के भाव बेचने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में हरियाणा के तीन विभाग वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन, हैफेड और फूड सिविल सप्लाई शामिल हैं। इन तीनों ही विभाग के दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। डिप्टी सीएम ने कहा कि सरकार गरीबों के राशन पर डाका डालने वालों को लेकर काफी गंभीर है।

उन्होंने कहा कि सात साल के दस्तावेजों की जांच एक दिन में नहीं हो सकती है। यह अधिकारी कर्मचारी एक डिपार्टमेंट के नहीं है बल्कि राज्य के तीन विभागों के अधिकारी हैं। ई- टेडरिंग पर चौटाला ने कहा कि डिजिटल युग में सबको अपनी सुविधा अच्छी लगती है। हमने 28 विभागों को ऑनलाइन किया है। व्यवस्था एक दिन में नहीं बदलती है, मुझे पूर्ण विश्वास है कि काम धीरे-धीरे सुचारू रूप से चलना शुरू हुआ है। महीनेभर में जो थोड़ी बहुत कमी पेशी है, उसे भी दुरुस्त किया जाएगा।

गौरतलब है कि कैथल में गत वर्ष 22 करोड़ रुपए से अधिक की 11 हजार मीट्रिक टन गेहूं को जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा जानबूझकर खुले में रखकर एक षड्यंत्र के तहत सड़ाने का मामला सामने आया था। इस संबंध में जिला प्रशासन ने एक जांच के बाद संबंधित अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी थी। बाद में यह मामला मीडिया में उजागर होने के बाद हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला द्वारा इस पूरे मामले की जांच उच्च स्तरीय अधिकारियों को सौंपी गई थी। एक कमेटी का गठन किया गया था, जिसे एक महीने में जांच खत्म कर रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए गए थे। वहीं हैरानी की बात यह है कि 2 महीने से अधिक का समय गुजरने के बाद भी न तो किसी उच्च स्तरीय टीम ने मौके का मुआयना किया और ना ही किसी अधिकारी पर कोई कार्रवाई हुई है। डिप्टी सीएम का कहना है कि कमेटी द्वारा खुद इस जांच के लिए समय मांगा गया था। इसलिए इस पूरे मामले की जांच रिपोर्ट आने में समय लग रहा है। वहीं उन्होंने यह भी आश्वासन दिया है कि जिन अधिकारियों के समय में करोड़ों रुपए का गेहूं सड़ा है, उनमें से किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा।

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