ओडिशा के पारादीप बंदरगाह को किया जाएगा हाइड्रोजन हब के रूप में विकसित: सर्बानंद सोनोवाल

बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने अपने प्रमुख बंदरगाहों में से प्रत्येक की कुल बिजली मांग में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी को 10 फीसदी से कम की वर्तमान हिस्सेदारी से बढ़ाकर 60 फीसदी करने का भी फैसला लिया है।

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केंद्रीय जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मंगलवार को कहा कि ओडिशा के पारादीप बंदरगाह सहित तीन प्रमुख बंदरगाहों को 2030 तक हाइड्रोजन हब के रूप में विकसित किया जाएगा। पारादीप के अलावा दो अन्य बंदरगाह हैं- दीनदयाल बंदरगाह और वी.ओ. चिदंबरार बंदरगाह।

सर्बानंद सोनोवाल ने मुंबई में 'ग्रीन पोर्ट और ग्रीन शिपिंग' पर चर्चा के दौरान कहा, 'जैसा कि राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन में यह बात रखी गई है कि बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने पारादीप बंदरगाह, दीनदयाल बंदरगाह और वीओ चिदंबरर बंदरगाह को हाइड्रोजन हब के रूप में विकसित करने के लिए चिन्हित और नामित किया है। ये बंदरगाह वर्ष 2030 तक हरित हाइड्रोजन के प्रबंधन, भंडारण और उत्पादन में सक्षम हैं।'

उन्होंने कहा कि बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने अपने प्रमुख बंदरगाहों में से प्रत्येक की कुल बिजली मांग में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी को 10 फीसदी से कम की वर्तमान हिस्सेदारी से बढ़ाकर 60 फीसदी करने का भी फैसला लिया है। बंदरगाहों ने वर्ष 2030 तक प्रति टन कार्गो के कार्बन उत्सर्जन को 30 फीसदी तक कम करने का भी लक्ष्य रखा है।

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